Cuffe Parade Cyber Scam प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Elderly Targeted Online: भारत में डिजिटल क्रांति ने जहाँ जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए ठगी के नए द्वार भी खोल दिए हैं। दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके कफ परेड में रहने वाली एक 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला डिजिटल जालसाजों की भावनात्मक चाल का शिकार हो गई। सोशल मीडिया पर खुद को एक विदेशी डॉक्टर बताने वाले शख्स ने महिला की सहानुभूति का फायदा उठाते हुए उनसे किश्तों में कुल 50.80 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली। इस सनसनीखेज साइबर अपराध ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ठगी की यह पूरी प्रक्रिया इतनी सोची-समझी थी कि पीड़िता को महीनों तक भनक भी नहीं लगी कि वह किसी जाल में फंस चुकी हैं। आरोपी ने खुद को एक प्रतिष्ठित पद पर बैठे व्यक्ति के रूप में पेश किया और पीड़ित महिला के अकेलेपन और दयालु स्वभाव का शोषण किया। जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह खेल फरवरी के मध्य तक चला, जिसमें महिला ने अपनी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा गँवा दिया।
इस धोखाधड़ी की नींव जनवरी 2026 में पड़ी, जब महिला को फेसबुक पर ‘जोशुआ विलियम डगलस’ नाम के एक व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। आरोपी ने खुद को न्यूजीलैंड का एक डॉक्टर बताया और दावा किया कि वह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र (UN) के मिशन पर युद्धग्रस्त देश यमन में तैनात है। आरोपी ने खुद को एक विधुर और पांच साल की बीमार बेटी ‘माया’ का पिता बताकर महिला का भावनात्मक भरोसा जीत लिया। जैसे ही बातचीत फेसबुक से व्हाट्सएप पर शिफ्ट हुई, उसने अपनी बेटी की जान बचाने के नाम पर पैसों की मांग शुरू कर दी।
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ठग ने दक्षिण मुंबई की महिला को बताया कि उसकी बेटी ने जहरीला खाना खा लिया है और उसकी सर्जरी के लिए तत्काल धन की आवश्यकता है। महिला ने सहानुभूति दिखाते हुए पहले 30 हजार रुपये भेजे, लेकिन ठग यहीं नहीं रुका। इसके बाद उसने कभी युद्ध क्षेत्र में बैंक खाते फ्रीज होने का बहाना बनाया, तो कभी खुद को टाइफाइड होने की बात कहकर मेडिकल इमरजेंसी का नाटक किया। 3 जनवरी से 9 फरवरी 2026 के बीच, महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 50.80 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह सिलसिला तब रुका जब आरोपी ने फिर से एक बड़ी रकम की मांग की, जिससे महिला को संदेह हुआ।
जब महिला ने अपने बेटे को पूरी आपबीती सुनाई, तब परिवार को एहसास हुआ कि वे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर स्कैम का शिकार हो चुके हैं। संपर्क करने पर आरोपी के सभी नंबर बंद मिले, जिसके बाद पीड़िता ने दक्षिण मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उन बैंक खातों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अजनबी से सोशल मीडिया पर वित्तीय लेनदेन न करें और ‘मेडिकल इमरजेंसी’ या ‘इमोशनल’ कहानियों पर भरोसा करने से पहले वास्तविकता की जांच जरूर करें।