वे महाराष्ट्र के गद्दार और राज्य के दुश्मन, मिसिंग लिंक की आलोचना करने वालों पर एकनाथ शिंदे का भड़का गुस्सा

CM Eknath Shinde Missing Link Project Criticism: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की आलोचना को महाराष्ट्र का अपमान और ऐसी आलोचना करने वाले को राज्य का गद्दार बताया है।
Eknath Shinde On Missing Link Issue
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (फोटो क्रेडिट-X)
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Eknath Shinde On Missing Link Issue: महाराष्ट्र विधान परिषद के मानसून सत्र में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की महत्वाकांक्षी 'मिसिंग लिंक' परियोजना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा गतिरोध बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। विपक्ष द्वारा परियोजना में भ्रष्टाचार और भूस्खलन को लेकर उठाए गए सवालों पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए पलटवार किया है।

सदन में बोलते हुए उपमुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि बुनियादी ढांचे की वैश्विक स्तर की परियोजनाओं की आलोचना करना किसी सरकार, मुख्यमंत्री या मंत्री की बदनामी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारे पूरे महाराष्ट्र राज्य की बदनामी है। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए राज्य के विकास कार्यों पर झूठे कीचड़ उछाल रहे हैं, वे वास्तव में महाराष्ट्र के गद्दार और राज्य के दुश्मन हैं।

मिसिंग लिंक गिरा नहीं; सिर्फ 7.26 प्रतिशत बढ़ी लागत

विपक्ष द्वारा लगाए गए तकनीकी और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मिसिंग लिंक आधुनिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत और बेजोड़ नमूना है। उन्होंने विपक्ष के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए पूछा, "कुछ लोग कह रहे हैं कि मिसिंग लिंक गिर गया। अरे, क्या वाकई मिसिंग लिंक गिर गया है? कम से कम झूठे आरोप लगाने से पहले जमीनी हकीकत की जांच तो कर ली होती। इस विश्वस्तरीय परियोजना को बनाने में जनता का एक पैसा भी जोखिम में नहीं डाला गया है और वहां सुचारू रूप से यातायात चालू है।"

वित्तीय आंकड़ों का ब्योरा देते हुए उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मेगा प्रोजेक्ट की मूल स्वीकृत लागत 6,695 करोड़ रुपये थी, जो बाद में बढ़कर 7,189 करोड़ रुपये हुई। यह वृद्धि केवल 7.26 प्रतिशत है, जो स्वीकृत राशि के निर्धारित 10 प्रतिशत की सीमा से भी बेहद कम है, और यही अंतिम सच है।

कोल्हापुर-सतारा को क्रांतिकारी तोहफा

एकनाथ शिंदे ने इस परियोजना से जनता को होने वाले प्रत्यक्ष लाभों को सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि मिसिंग लिंक के पूरी तरह शुरू हो जाने से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और पुणे के बीच की दूरी का सफर पूरे 40 मिनट कम हो गया है। यह क्रांतिकारी समय सुधार केवल पुणे ही नहीं, बल्कि आगे सतारा और कोल्हापुर जाने वाले यात्रियों के लिए भी उतना ही मददगार साबित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि इस सुगम यातायात प्रणाली के कारण वाहनों को जाम से मुक्ति मिली है, जिससे प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपये के ईंधन की सीधी बचत हो रही है। ईंधन की बचत से न केवल आम जनता की जेब का खर्च कम हो रहा है, बल्कि क्षेत्र में वाहनों से होने वाले कार्बन प्रदूषण और ट्रैफिक जाम की समस्या में भी भारी कमी आई है। आज इस अद्भुत इंजीनियरिंग को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आ रहे हैं, ऐसे में इसकी झूठी बदनामी करना महाराष्ट्र से विश्वासघात के अलावा कुछ नहीं है।

मुंबई की 1,913 किलोमीटर सड़कें होंगी पूरी तरह कंक्रीट

विपक्ष के प्रोपेगैंडा पर प्रहार करते हुए उपमुख्यमंत्री ने मुंबई-ट्रांस हार्बर लिंक यानी 'अटल सेतु' का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "अतीत में इन लोगों ने अटल सेतु को लेकर भी ऐसा ही दुष्प्रचार किया था कि वह ध्वस्त हो गया है, जबकि सच्चाई यह थी कि केवल एक मुख्य सर्विस अप्रोच रोड पर हल्की सी दरार आई थी जिसे तुरंत ठीक कर दिया गया। आज उसी अटल सेतु पर रोजाना 30,000 से अधिक वाहन बिना किसी बाधा के सुरक्षित सफर तय कर रहे हैं।"

मुंबई की सड़कों की स्थिति पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री ने एक बड़ा रोडमैप साझा किया। उन्होंने बताया कि मुंबई में सड़कों की कुल लंबाई 2,050 किलोमीटर है। सरकार की 'मेगा सीसी रोड परियोजना' के तहत अब तक 575 किलोमीटर सड़कों का कंक्रीटीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस महापरियोजना के पूरी तरह संपन्न होने के बाद मुंबई शहर के भीतर कुल 1,913 किलोमीटर कंक्रीट की बेहतरीन सड़कें उपलब्ध होंगी, जिससे हर साल मानसून में होने वाले गड्ढों और उनकी मरम्मत पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये के प्रशासनिक फंड की स्थायी बचत होगी।

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