Mumbai News: एकनाथ शिंदे ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार से सम्मानित, विधानसभा में पारित हुआ अभिनंदन प्रस्ताव
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को वारकरी संप्रदाय के प्रतिष्ठित ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार मिलने पर अभिनंदन प्रस्ताव पेश किया, जिस पर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उत्तर दिया।
- Written By: आंचल लोखंडे
एकनाथ शिंदे ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार से सम्मानित। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार प्राप्त करना मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है, और यह मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन का सबसे आनंददायक, संतोषजनक और भाग्यशाली क्षण है। इस पुरस्कार से मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है, और आम लोगों के दुख दूर करना ही मेरा धर्म है, ऐसा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील ने आज विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को वारकरी संप्रदाय के प्रतिष्ठित ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार मिलने पर अभिनंदन प्रस्ताव पेश किया, जिस पर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उत्तर दिया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, “यह पुरस्कार केवल मेरा नहीं है। यह उन सभी वारकरी संतों और किसानों का है जिन्होंने मुझे और मेरे कार्यों को हमेशा आशीर्वाद दिया। यह मेरे प्रिय भाइयों और बहनों का भी है। पूजनीय बालासाहेब ठाकरे ने मुझे हिंदुत्व और महाराष्ट्र की सेवा का संकल्प दिया, जबकि धर्मवीर आनंद दिघे ने जनसेवा के संस्कार दिए। तुकाराम महाराज के नाम से प्राप्त यह पुरस्कार उन्हीं संस्कारों का सम्मान है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह पुरस्काररूपी आशीर्वाद मुझे आम आदमी को सुपरमैन बनाने की और अधिक शक्ति दे।”
“भले दरी देऊ कासेची लंगोटी, नाठाळाचे माथी हाणू काठी”
संत तुकाराम महाराज की एक प्रसिद्ध उक्ति का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “भले दरी देऊ कासेची लंगोटी, नाठाळाचे माथी हाणू काठी” (यदि कोई व्यक्ति आपके प्रति निष्ठावान है, तो उसे अपनी अंतिम वस्त्र तक दे देना चाहिए, लेकिन यदि कोई छल करता है, तो उसे सही मार्ग पर लाना आवश्यक है)। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस सीख को अपने जीवनभर अपनाया है।
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सामान्य जनता के दुख दूर करना ही मेरा धर्म
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने वारकरी संप्रदाय के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। “इतिहास में पहली बार, हमारी सरकार ने वारकरी दिंडियों के लिए अनुदान दिया। वारकरी समुदाय के लिए एक बीमा योजना शुरू की गई, यात्रा के दौरान लाखों वारकरी संतों के स्वास्थ्य परीक्षण कराए गए, पालखी मार्ग और पंढरपुर के विकास कार्यों को गति दी गई।
हमने भगवान विट्ठल के दर्शन हेतु कतारबद्ध प्रणाली के लिए तत्काल निधि जारी की। मंदिर संस्कृति और संस्कारों का केंद्र है, इसलिए हमने बी-श्रेणी तीर्थक्षेत्र मंदिरों के लिए निधि ₹2 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी। उन्होंने कहा पहली बार वारकरी संप्रदाय के लिए एक स्वतंत्र महामंडल की स्थापना की गई।
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वारकरी संप्रदाय का ऋण
उन्होंने जोर देकर कहा कि वारकरी संप्रदाय से बड़ा कोई वीआईपी नहीं हो सकता। “जब भी मैं पंढरपुर गया, मैंने अपने वीआईपी काफिले को अलग रखकर बुलेट मोटरसाइकिल पर यात्रा की,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि वारकरी संप्रदाय की सेवा कोई एहसान नहीं बल्कि उनके समाज पर किए गए उपकारों का प्रतिदान है। “वारकरी संप्रदाय के ऋण को कोई सात जन्मों तक भी चुका नहीं सकता,” उन्होंने जोड़ा।
विधानसभा में अभिनंदन प्रस्ताव पर उत्तर
संत तुकाराम महाराज के शब्दों “शुद्धबीजा पोटीं, फळें रसाळ गोमटीं” का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “महा युति सरकार की विचारधारा का बीज शुद्ध है, और यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी के सपनों का भारत विकसित हो रहा है।” “यह पुरस्कार मेरे लिए किसी भी पद से बड़ा है। मैं वारकरी संप्रदाय की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहूँगा,” उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आश्वासन दिया।
