उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Eknath Shinde On BMC Mayor: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों के बाद सत्ता के समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हैं। इस बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। शिंदे ने साफ किया है कि शिवसेना भाजपा नीत ‘महायुति’ को मिले जनमत का पूरा सम्मान करेगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी की सत्ता को ‘पावर सेंटर’ माना जाता है। हालिया चुनाव परिणामों में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को जो बहुमत मिला है, उसे लेकर एकनाथ शिंदे का रुख बेहद संतुलित है। शिंदे का मानना है कि जनता ने महायुति पर भरोसा जताया है, इसलिए किसी भी स्तर पर गठबंधन की मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि शिंदे इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में शक्ति संतुलन किसके पक्ष में है। उन्होंने अभी तक मेयर पद को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से कोई औपचारिक मांग या चर्चा नहीं की है, जो इस बात का संकेत है कि वह गठबंधन में स्थिरता चाहते हैं।
शिवसेना के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक आलीशान पांच सितारा होटल में ठहराया गया है। विपक्ष और राजनीतिक गलियारों में इसे ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ या पार्षदों को टूटने से बचाने की कवायद (बाड़ाबंदी) के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, शिंदे खेमे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
एकनाथ शिंदे के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस कदम को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। दरअसल, यह होटल प्रवास कोई राजनीतिक घेराबंदी नहीं, बल्कि नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए एक ‘प्रशिक्षण कार्यशाला’ है। इसका उद्देश्य नए पार्षदों को बीएमसी की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और उन्हें यह समझाना है कि भविष्य में उनसे नेतृत्व की क्या उम्मीदें हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शिंदे के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को संभालना है। दिवंगत शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी का वर्ष होने के कारण, शिवसैनिकों की प्रबल इच्छा है कि इस खास मौके पर बीएमसी का महापौर शिवसेना से हो।
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शिंदे के एक सहयोगी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि शिंदे जानते हैं कि भाजपा मेयर पद की मांग आसानी से नहीं मानेगी, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से पीछे हटते हुए भी नहीं दिखना चाहते। रणनीति यह है कि मेयर पद पर चर्चा जारी रखकर पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जाए और बदले में प्रशासन की महत्वपूर्ण समितियों में शिवसेना के लिए बेहतर हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
कुल मिलाकर, एकनाथ शिंदे एक ऐसी राह पर चल रहे हैं जहां वह न तो भाजपा के साथ संबंधों में कड़वाहट चाहते हैं और न ही अपनी पार्टी के भीतर किसी असंतोष को पनपने देना चाहते हैं। संदेश साफ है जनादेश सर्वोपरि है, और महायुति के भीतर समन्वय ही मुंबई के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।