महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज: मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मिले एकनाथ खड़से; गुलाबराव पाटिल ने कसा तीखा तंज

Maharashtra Politics: NCP नेता एकनाथ खड़से ने मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। बीजेपी में वापसी की अटकलों के बीच इस मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज।
NCP leader Eknath Khadse meets Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray at Matoshree, triggering intense political speculation in Maharashtra amid BJP return rumors.
उद्धव ठाकरे, एकनाथ खड़से (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Eknath Khadse Matoshree Meets Uddhav Thackeray ShivSena: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे से उनके आवास मातोश्री में मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बीजेपी में वापसी की अटकलों के बीच नई मुलाकात

कुछ दिन पहले एकनाथ खड़से की भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े से भी मुलाकात हुई थी। इसके बाद उनके बीजेपी में वापसी की अटकलें तेज हो गई थीं। अब उद्धव ठाकरे से मुलाकात ने इन राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। हालांकि, दोनों मुलाकातों के एजेंडे या किसी राजनीतिक फैसले को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

गुलाबराव पाटिल ने ली चुटकी

शिंदे गुट के मंत्री गुलाबराव पाटिल ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा, "पहला पिक्चर खत्म होने के बाद नया पिक्चर शुरू करना इतना आसान नहीं होता।" उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक अटकलों पर व्यंग्य के रूप में देखा जा रहा है।

उद्धव से पहले पवार से मुलाकात कर चुके हैं खडसे

इससे पहले खडसे ने सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार से दिल्ली में मुलाकात की और दावा किया कि उन्होंने सिंचाई के मुद्दों पर बातचीत की है। खडसे ने कहा था कि मंगलवार को वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से भी मुलाकात करेंगे। बता दें, पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में जमीन कब्जाने के आरोपों में 2016 में खडसे ने राजस्व मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

अच्छा होगा अगर BJP-शिवसेना एक साथ आ जाएं: मनोहर जोशी

इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता मनोहर जोशी ने कहा कि मेरी राय में यह अच्छा होगा अगर बीजेपी और शिवसेना एक साथ आ जाएं। लेकिन वर्तमान में दोनों पार्टियां ऐसा नहीं चाहती हैं। जोशी ने पत्रकारों से कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इस मुद्दे पर उचित समय पर निर्णय लेंगे।

उन्होंने कहा, 'छोटे मुद्दों पर लड़ने की जगह बेहतर है कि कुछ बातों को बर्दाश्त किया जाए। जिन मुद्दों को आप दृढ़ता के साथ महसूस करते हैं, उसे साझा करना अच्छा है। अगर दोनों दल साथ में काम करते हैं तो यह दोनों के लिए बेहतर होगा।'

जोशी ने कहा, 'ऐसा नहीं है कि शिवसेना अब कभी भी भाजपा के साथ नहीं जाएगी। उद्धव ठाकरे सही समय पर सही निर्णय लेंगे।' वरिष्ठ शिवसेना नेता का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब दोनों दलों के बीच हाल में मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन पाने के चलते अलगाव हो गया था। इसके बाद शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई।

उद्धव ने स्पष्ट किया- सवालों के जवाब तक CAB पर समर्थन नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि शिवसेना राज्यसभा में तब तक नागरिकता (संशोधन) विधेयक का समर्थन नहीं करेगी, जब तक कि पार्टी द्वारा लोकसभा में उठाए गए सवालों का जवाब नहीं मिल जाता।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को इस विधेयक को लागू करने से अधिक अर्थव्यवस्था, नौकरी संकट और बढ़ती महंगाई पर चिंतित होना चाहिए। ठाकरे ने कहा, 'हमें इस धारणा को बदलना होगा कि इस विधेयक और भाजपा का समर्थन करने वाले देशभक्त हैं और जो इसका विरोध कर रहे हैं वो राष्ट्र-द्रोही हैं। विधेयक को लेकर उठाए गए सभी मु्द्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।'

भाजपा पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने उम्मीद जताई कि भारत में शरण मांगने वालों और इस विधेयक के दायरे में आने वालों को अब अधिक प्याज मिलेगा। ठाकरे ने कहा, 'भाजपा को लगता है कि जो कोई (इससे) असहमत है, वह देशद्रोही है। ये शरणार्थी कहां रुकेंगे  किस राज्य में। यह सबकुछ स्पष्ट होना चाहिए।' उन्होंने कहा, “हमने कुछ सवाल उठाए हैं लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिए हैं।यह एक भ्रांति है कि सिर्फ भाजपा को देश का खयाल है।'

सरकार बचाने की जुगत में हैं उद्धव: फडणवीस

नागरिकता संसोधन बिल पर शिवसेना के समर्थन पर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और विपक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि लगता है उद्धव ठाकरे सरकार बचाने की जुगत में हैं। उनके बयान से ऐसा लगता है कि वो CAB पर संसद में अपना रवैया बदलने के मन में है। फडणवीस ने कहा कि यह बिल किसी धर्म के विरोध में नहीं है, यह हमारी सरकार ने साफ कर दिया है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी उत्सुकता

लगातार हो रही इन राजनीतिक मुलाकातों ने राज्य की राजनीति में संभावित बदलावों और नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी भी दल या नेता की ओर से गठबंधन, दल-बदल या राजनीतिक रणनीति में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल इन मुलाकातों को राजनीतिक संवाद और संभावित रणनीतिक चर्चाओं के रूप में देखा जा रहा है।

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