कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर (सौ. सोशल मीडिया )
Navi Mumbai News In Hindi: बांग्लादेश में निर्दोष हिंदुओं की हत्या की जा रही है, अगर बाल ठाकरे जीवित होते तो किसी की हिम्मत नहीं होती। महाराष्ट्र में बाल ठाकरे जैसे ‘शेर’ की कमी महसूस की जा रही है।
जो देश, संस्कृति और सनातन के हित में बात करते थे और किसी से नहीं डरते थे, इसलिए बाल ठाकरे को लेकर गर्व महसूस करता हूं। सनातन विचारों के प्रखर प्रवक्ता पूज्य देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने बुधवार को नवी मुंबई में स्थित ‘नवभारत’ तथा ‘नवराष्ट्र’ के कार्यालय में सदिच्छा भेंट के दौरान अपने विचार व्यक्त किए।
महाराज ने ठाकरे को याद करते हुए कहा कि मुंबई से ठाकरे की दहाड़ पर पाकिस्तान भारत में क्रिकेट नहीं खेल पाया। इसी तरह देश के प्रति सभी को वफादार बना रहना चाहिए, सभी को प्रण लेना चाहिए कि बांग्लादेशियों को कोई काम न दें।
ठाकरे ने कभी किसी को मारने के लिए नहीं कहा, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कोई मार कर चला जाए, यह भी स्वीकार नहीं है। महाराज ने कहा कि सनातनियों पर अत्याचार करने वालों को सबक सिखाओ। जो हम पर बम फोड़े, उसे भुखमरी की कगार पर ला दो।
महाराज ने कहा कि देश को पहली बार नरेंद्र मोदी के रूप में प्रधानमंत्री मिला है, जो गंगा में डुबकी लगात्ता है, केदारनाथ की गुफा में बैठता है और अपने माथे पर गर्व से तिलक लगवाता है। वे खुलकर सनातन संस्कृति को बचाने के अभियान में लगे हुए हैं। आपको तिलक लगाने में या होली में अपने गालों पर रंग लगवाने में काहे का संकोच ? जब आप मजार पर चादर भेजने में संकोच नहीं करते तो फिर माथे पर तिलक लगवाने में संकोच क्यों करते हो।
नववर्ष का जिक्र करते हुए महाराज ने कहा कि नववर्ष की छुट्टियों में आज सभी तीर्थस्थलों पर सनातनियों की अपार भीड़ उमड़ी है। सनातनी अब फिल्मी शो के बदले तीर्थस्थलों पर जाना पसंद कर रहे है। देश के सभी प्रमुख मंदिरों में इतनी भीड़ है कि और लोगों की आने से मना करना पड़ रहा है। यह सनातन की एकता का प्रमाण है। महाराज ने कहा कि जिस दिन समस्त सनातनी पूरी तरह जाग जाएंगे, उस दिन सनातन की आख दिखाने की किसी की हिम्मत नहीं होगी।
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‘नवभारत’ की सराहना करते हुए कहर कि ‘नवभारत’ सीधी और स्कट बातें लिखता है। एकदम स्टेट फॉरवर्ड बिना किसी लाग लपेट के बाते रखता है। यही समाज को चाहिए, ठाकुर महाराज ने कहा कि फरार, कथाकार और कलाकार समाज को तीन अईने है। ये ही सत्यम शिवम सुंदरम है। पत्रकार रचनात्मक शब्द लिखते हैं, कलाकार समाज में सुंदर विवारों का प्रसार करते हैं, कथाकार शिवम के रूप में भगवान के प्रति लोगों को प्रेरित करते हैं। ये तीनों ही समाज को सही दिशा देते हैं, लेकिन कलाकार जिस तरह की फिल्में बना रहे हैं, वे जिस तरह के सीरियल बना रहे है उसी से समाज दूषित हो रहा है।