मैसेज किफायत का और सवारी बुलेट की? देवेंद्र फडणवीस के ईंधन बचाओ अभियान पर नेटिजन्स ने उठाए सवाल
Bullet Ride Controversy: देवेंद्र फडणवीस द्वारा बुलेट से सफर कर ईंधन बचत का संदेश देने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। नेटिजन्स इसे पीआर स्टंट बता रहे हैं। जानें नेताओं की इस पहल पर जनता की राय।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांकेतिक फोटो (सोर्स: एक्स @Dev_Fadnavis)
Devendra Fadnavis Bullet Ride: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों सादगी और किफायत का नया दौर देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ईंधन संकट को देखते हुए ईंधन बचत के आह्वान के बाद महाराष्ट्र के दिग्गज नेता अपनी लग्जरी गाड़ियां छोड़कर सड़कों पर उतर आए हैं। लेकिन, सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों प्रशंसा से ज्यादा सवाल और ट्रोलिंग की गूंज सुनाई दे रही है। विवाद के केंद्र में हैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी रॉयल एनफील्ड बुलेट।
बुलेट के माइलेज पर मचा बवाल
दरअसल, देवेंद्र फडणवीस ने ईंधन बचाने का संदेश देने के लिए बुलेट से मंत्रालय का सफर तय किया। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे ईंधन की बचत करें। लेकिन एक्स और फेसबुक पर जनता ने उनके इस कदम को आड़े हाथों लिया है। नेटिजन्स का तर्क है कि अगर फडणवीस वाकई पेट्रोल बचाना चाहते थे, तो उन्होंने बुलेट को ही क्यों चुना?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ट्वीट्स में लोग लिख रहे हैं, फडणवीस को पीआर (PR) करना था तो बाइक चुनी, लेकिन बुलेट क्यों? यह तो सबसे कम माइलेज देने वाली बाइक है! तकनीकी रूप से जागरूक जनता का कहना है कि बुलेट मुश्किल से 35-37 किमी प्रति लीटर का एवरेज देती है। जितने पेट्रोल में फडणवीस मंत्रालय पहुंचे, उतने में कोई साधारण दुपहिया वाहन या इलेक्ट्रिक बाइक दोगुनी दूरी तय कर सकती थी। कई यूजर्स इसे मात्र एक पॉलिटिकल पीआर स्टंट करार दे रहे हैं।
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गडकरी, राणे और शिंदे की सादगी की परीक्षा
इंधन बचत की इस रेस में केवल देवेंद्र फडणवीस ही नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जो हमेशा से परिवहन क्रांति की बात करते हैं, हाल ही में बस में सफर करते नजर आए। वहीं, कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अपने सरकारी निवास से मंत्रालय तक का सफर पैदल ही तय किया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी स्पष्ट किया है कि वे अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता देंगे और उनके काफिले में केवल सुरक्षा के लिए आवश्यक गाड़ियां ही रहेंगी।
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नेटिजन्स के मन में बड़ा सवाल
भले ही मंत्रियों की ये तस्वीरें सुर्खियां बटोर रही हों, लेकिन जनता के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता और संदेह दोनों हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है कि क्या ये वीआईपी नेता वाकई अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल छोड़कर लंबे समय तक बस, पैदल या कम सीसी वाली गाड़ियों में सफर कर पाएंगे? या फिर यह केवल कैमरा और हेडलाइंस के लिए किया गया कुछ दिनों का फोटो ऑप है? महाराष्ट्र की राजनीति में सादगी का यह प्रदर्शन क्या वाकई ईंधन संकट का समाधान बनेगा या केवल राजनीतिक चर्चा का विषय बनकर रह जाएगा, इस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं।
