‘देवाभाऊ टैक्सी’ योजना पर विवाद, आरटीआई दस्तावेज में सहकारी संस्था की वित्तीय स्थिति पर उठे सवाल
महाराष्ट्र में प्रस्तावित Devabhau Taxi Scheme RTI से सामने आए दस्तावेजों के बाद विवादों में आ गई है। संस्था की वित्तीय स्थिति, चुनाव प्रक्रिया और योजना की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े किए गए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
देवेंद्र फडणवीस (डिजाइन फोटो) (फाइल फोटो )
Devabhau Taxi Scheme News Update: महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष प्रवीण दरेकर की ओर से घोषित ‘देवभाऊ टैक्सी’ योजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
आरटीआई के आधार पर जारी एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि जिस देवदत्त सहकारी पर्यटन व वाहतूक संस्था मर्यादित, मुंबई के माध्यम से योजना शुरू करने की घोषणा की गई है, उसकी वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर है।
दिवालिया हुए संस्था का बैंक बैलेंस शून्य है। इसी के साथ ही सीमित सदस्य संख्या और वर्षों से चुनाव नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इन तथ्यों के आधार पर योजना की पारदर्शिता, संस्था की पात्रता और सार्वजनिक धन के उपयोग पर जवाब मांगा गया है।
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दस्तावेज के अनुसार संस्था वर्ष 2001 में पंजीकृत हुई थी, लेकिन उसके केवल 25 से 28 सदस्य हैं। संस्था को लगातार कई वर्षों से ऑडिट में ‘क’ श्रेणी मिली है। वर्ष 2023-24 में उसका लाभ मात्र 941 रुपए और वर्ष 2024-25 में 7,082 रुपए बताया गया है। वहीं 2024-25 में कुल अनुबंधित कार्य केवल 14,600 रुपए का होने का दावा किया गया है। मार्च 2025 तक बैंक खाते में 246 रुपए और नकद 368 रुपए होने का उल्लेख है। साथ ही 2012-13 के बाद संस्था में कोई चुनाव नहीं होने का भी दावा किया गया है।
‘भारत टैक्सी’ योजना को नहीं दी गई प्राथमिकता
दस्तावेज में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लोकप्रिय नाम ‘देवभाऊ’ पर योजना का नाम रखा गया, जबकि केंद्र सरकार की ‘भारत टैक्सी’ योजना को प्राथमिकता नहीं दी गई।
इसे राजनीतिक ब्रांडिंग और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जोड़ते हुए योजना का नाम तटस्थ रखने की मांग की गई है। इसी के साथ ही सहकारी सस्था के कथित राजनीतिक उपयोग की उच्चस्तरीय जांब कराने की मांग भी की गई है।
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एक साल में केवल 2 लेन-देन
मुंबई जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के कथित खाते के विवरण का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के दौरान खाते में केवल 2 लेन-देन हुए, जो न्यूनतम शेष राशि नहीं रखने पर बैंक द्वारा लगाए गए जुर्माने से संबंधित थे, वर्ष के अंत में खाते का शेष शून्य बताया गया है। इसी आधार पर करोड़ों रुपए का कर्ज देने की प्रस्तावित घोषणा पर भी सवाल उदाए गए है।
