मुंबई का ‘शून्य पुल’ तेजी से ले रहा आकार, आर्यभट्ट की विरासत को देगा नई पहचान
Mumbai Zero Bridge: मुंबई मेट्रो-2बी परियोजना के तहत वाकोला नाले पर बन रहा 'शून्य पुल' तेजी से आकार ले रहा है। आर्यभट्ट की शून्य अवधारणा से प्रेरित यह पुल आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा प्रतीक बनेगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई ज़ीरो ब्रिज प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Zero Bridge Metro 2B News: भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट की विश्वविख्यात ‘शून्य’ अवधारणा से प्रेरित मुंबई का अनूठा ‘शून्य पुल’ न केवल अनूठी इंजीनियरिंग की मिसाल है, बल्कि यह अब तेजी से आकार भी ले रहा है।
वाकोला नाले पर मेट्रो-2बी परियोजना के तहत बन रहे इस पुल के जीरो आकार का पायलॉन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है, जबकि बैंक स्पैन का निर्माण अंतिम चरण में है। अब परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण 80 मीटर लंबे मुख्य स्पैन के निर्माण का है, जिस पर जल्द काम शुरू होगा।
बताया गया है कि इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है। वहीं आधुनिक इंजीनियरिंग और भारत की वैज्ञानिक विरासत का अद्भुत संगम बनने जा रहा यह पुल भविष्य में मुंबई की नई पहचान और प्रतिष्ठित लैंडमार्क के रूप में उभरेगा।
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डीएन नगर से मानखुर्द के मंडाले तक बनने वाली मुंबई मेट्रो लाइन-2बी के प्रतिष्ठित शून्य पुल की विशेष पायलॉन संरचना इसे ‘शून्य’ का आकार प्रदान करती है, जिसका डिजाइन दुनिया को शून्य की अवधारणा से परिचित करानेवाले भारत के प्राचीन महान गणितज्ञ आर्यभट्ट को श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किया गया है।
बता दें कि पुल के बैंक स्पैन का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस हिस्से के लिए निर्धारित 12 प्रीकास्ट सेगमेंट में से 11 सेगमेंट सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही कास्ट-इन-सिटू का कार्य भी तय योजना के अनुसार प्रगति पर है। अब परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण 80 मीटर लंबे मुख्य स्पैन के निर्माण का है, जिस पर जल्द काम शुरू किया जाएगा। यही मुख्य स्पैन इस पुल की सबसे बड़ी पहचान बनेगा और पूरी संरचना को अंतिम स्वरूप प्रदान करेगा।
विरासत का प्रतीक
मुंबई का शून्य ब्रिज आकार ले रहा है। यह प्राचीन भारतीय ज्ञान और विश्वस्तरीय भारतीय इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है। मेट्रो लाइन 2वी पर बन रहा यह शून्य के आकार का प्रतिष्ठित पुल भारतीय नवाचार और विरासत का प्रतीक है।
डॉ। संजय मुखर्जी, महानगर आयुक्त, एमएमआरडीए
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अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने का संदेश
‘शून्य पुल केवल एक परिवहन संरचना नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक सोच और नवाचार की परंपरा को समर्पित एक प्रतीकात्मक स्मारक भी है। सदियों पहले आर्यभट्ट द्वारा दुनिया को दिए गए शून्य के सिद्धांत ने गणित और विज्ञान की दिशा बदल दी थी। उसी ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित यह पुल आधुनिक इंजीनियरिंग के माध्यम से अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने का संदेश देता है।
