मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदी भवन निर्माण की मांग तेज, आशीष शेलार से मिला प्रतिनिधिमंडल

Mumbai News: मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदी भवन निर्माण की पुरानी मांग को लेकर हिंदी भाषियों का प्रतिनिधिमंडल सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार से मिला। मंत्री ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
आशीष शेलार प्रतिनिधिमंडल बैठक (pic credit; social media)
आशीष शेलार प्रतिनिधिमंडल बैठक (pic credit; social media)
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Maharashtra News: मुंबई विश्वविद्यालय परिसर में लंबे समय से लंबित पड़े हिंदी भाषा भवन के निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस मुद्दे को लेकर हिंदी भाषी समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से कहा कि मुंबई जैसे महानगर में, जहां हिंदी भाषियों की बड़ी संख्या है, वहां विश्वविद्यालय परिसर में हिंदी भवन का होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस भवन के निर्माण का प्रस्ताव काफी समय से लंबित पड़ा है और इसके लिए राशि का भी प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। बावजूद इसके निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है, जिससे हिंदी भाषी समाज में नाराजगी और निराशा है।

मंत्री शेलार ने प्रतिनिधिमंडल की बात ध्यान से सुनी और आश्वासन दिया कि इस संबंध में उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हिंदी भाषा भवन के निर्माण का मुद्दा जल्द ही प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमरजीत मिश्रा ने किया। उन्होंने बताया कि यह भवन केवल हिंदी भाषियों के लिए ही नहीं, बल्कि मुंबई की सांस्कृतिक और शैक्षणिक धरोहर को और सशक्त करने के लिए जरूरी है। भवन के माध्यम से हिंदी साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सकेगा और छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।

इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के सामने एक और मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि अंधेरी पूर्व के गुंदवली महानगरपालिका स्कूल में निर्मित नाट्यगृह वर्तमान में चुनाव कार्यालय के रूप में उपयोग किया जा रहा है। समुदाय की मांग है कि चुनाव कार्यालय को अन्यत्र स्थानांतरित कर इस नाट्यगृह को फिर से सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए खोला जाए।

हिंदी भाषी समाज का कहना है कि मुंबई जैसे बहुभाषी शहर में हिंदी भाषा और संस्कृति को सम्मान मिलना चाहिए। हिंदी भवन का निर्माण न केवल उनकी पुरानी मांग को पूरा करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी भाषा और साहित्य से जोड़ने का काम करेगा।

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