‘देख ले! इंडिया’ में दिखी ब्लाइंड महिला क्रिकेटर्स की महागाथा, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने जज्बे को किया सलाम
Dekh Le India Documentary: मुंबई के लोक भवन में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की मौजूदगी में दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'देख ले! इंडिया' की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई।
- Written By: आकाश मसने
भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ियों को सम्मानित करते राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा (सोर्स: एक्स@maha_governor)
Dekh Le India Documentary Screening: जिंदगी की पिच पर जब मुश्किलें बाउंसर बनकर आती हैं, तो कुछ लोग हार मान लेते हैं, और कुछ इतिहास रच देते हैं। भारतीय दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम की कहानी भी कुछ ऐसी ही इतिहास रचने वाली है। हाल ही में यूनिसेफ (UNICEF) ने मुंबई के लोक भवन में एक बेहद खास डॉक्यूमेंट्री ‘देख ले! इंडिया’ की स्क्रीनिंग आयोजित की। इस मौके पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने न सिर्फ पूरी फिल्म देखी, बल्कि इन जांबाज खिलाड़ियों के जज्बे को खड़े होकर सलाम किया।
यूनिसेफ ने की खास मौजूदगी में लोक भवन में
‘देख ले! इंडिया’ डॉक्यूमेंट्री दृष्टिबाधित महिलाओं की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सफर को दिखाती है। टीम के कई सदस्यों के साथ डॉक्यूमेंट्री देखने के बाद राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने पूरी टीम और खिलाड़ियों की उपलब्धियों की तारीफ की।
यह डॉक्यूमेंट्री टीम के सफर और इंटरनेशनल टूर्नामेंट में उनकी जीत को दिखाती है। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने घोषणा की कि लोक भवन में एक और स्क्रीनिंग आयोजित की जाएगी, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों को इसे देखने के लिए बुलाया जाएगा।
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माहितीपट निर्माते मुकुंद मूर्ती, भारतीय अंधमहिला राष्ट्रीय क्रिकेट संघाच्या उपकर्णधार गंगा कदम, युनिसेफ महाराष्ट्रचे क्षेत्रीय अधिकारी संजय सिंह, युनिसेफच्या कम्युनिकेशन स्पेशालिस्ट स्वाती महापात्रा, खेळाडू प्रिया खीर व सुषमा पटेल,संघाच्या व्यवस्थापक शिखा शेट्टी उपस्थित होत्या pic.twitter.com/abAMrT3xeN — Governor of Maharashtra (@maha_governor) July 8, 2026
ऑडिबल बॉल की आवाज पर बदल दी किस्मत
डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता मुकुंद मूर्ति ने बताया कि यह फिल्म समाज की सोच को बदलने का एक जरिया है। उन्होंने समझाया कि ये दृष्टिबाधित महिला क्रिकेटर सामान्य गेंद से नहीं, बल्कि एक खास तौर पर बनाई गई आवाज करने वाली ‘ऑडिबल बॉल’ से खेलती हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ये लड़कियां बेहद गरीब और मुश्किल सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड से निकलकर आईं और इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में भारत का झंडा गाड़ दिया। यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है; यह दोस्ती, अटूट विश्वास और हर सामाजिक व शारीरिक दीवार को ढहाने की महागाथा है।
क्या बाेलीं दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान गंगा कदम?
दृष्टिबाधित महिलाओं की भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की उप-कप्तान गंगा कदम ने अपने अनुभव साझा करत हुए कहा कि क्रिकेट ने मेरी जिंदगी बदल दी। इस खेल ने मुझे आत्मविश्वास, आगे बढ़ने की दिशा और अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया। पहले मुझे बुरा लगता था कि मैं दूसरों की तरह पढ़ नहीं सकती, लेकिन आज मुझे क्रिकेट खेलने पर गर्व है। यह फिल्म हमारी टीम के सफर को दिखाती है, लेकिन यह हर उस लड़की की कहानी भी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कई रुकावटों को पार करने की कोशिश कर रही है।”
इस मौके पर टीम की खिलाड़ी प्रिया खीर और सुषमा पटेल भी मौजूद थीं। क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया (CABI) के प्रेसिडेंट और समर्थनम ट्रस्ट फॉर द डिसेबल्ड के फाउंडर-मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. महांतेश जी. किवाडासन्नवर ने बताया कि क्रिकेट ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए कौन-कौन से नए मौके पैदा किए हैं। उन्होंने बताया कि CABI की पहल से US ब्लाइंड क्रिकेट टीम बनी और बाद में उसने वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया; इसे उन्होंने खेल की दुनिया में भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
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क्या है देख ले! इंडिया डॉक्यूमेंट्री में?
‘देख ले! इंडिया’ डॉक्यूमेंट्री भारत के अलग-अलग हिस्सों की दृष्टिबाधित महिला क्रिकेटरों के प्रेरणादायक सफर को दिखाती है। यह 70 मिनट की फिल्म है, जो इंग्लैंड में होने वाले वर्ल्ड ब्लाइंड गेम्स में उनके हिस्सा लेने तक की कहानी है। यह फिल्म दृष्टिबाधित युवाओं के दृढ़ संकल्प के साथ-साथ सबको साथ लेकर चलने और समान अवसरों के महत्व को भी उजागर करती है।
इस कार्यक्रम में यूनिसेफ महाराष्ट्र के फील्ड ऑफिसर संजय सिंह, यूनिसेफ की कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट स्वाति महापात्रा, खिलाड़ी प्रिया खीर और सुषमा पटेल और टीम मैनेजर शिखा शेट्टी भी मौजूद थीं।
