महाराष्ट्र लोक भवन में मना बंग दिवस, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने दोनों राज्यों के संबंधों पर कही ये बात

West Bengal Foundation Day In Mumbai: मुंबई के महाराष्ट्र लोक भवन में पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस मनाया। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने दोनों राज्यों की सांस्कृति और ऐतहासिक संबंधों पर बड़ी बात कही।
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राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के साथ पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर सोलापुर विश्वविद्यालय की छात्राएं (सोर्स- एक्स @maha_governor)
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West Bengal Foundation Day Celebrated In Maharashtra: मुंबई स्थित महाराष्ट्र लोक भवन में पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार की ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने महाराष्ट्र तथा देशभर में निवास कर रहे पश्चिम बंगाल के नागरिकों को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम की शुरुआत पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि के वीडियो संदेश से हुई, जिसमें उन्होंने राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भूमिका पर प्रकाश डाला।

महाराष्ट्र और बंगाल की सांस्कृतिक चेतना में समानता : राज्यपाल

सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि यद्यपि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल लगभग दो हजार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, फिर भी दोनों राज्यों के लोगों की भावना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की सोच में उल्लेखनीय समानता है।

उन्होंने कहा कि दोनों राज्य इतिहास, संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद की साझा विरासत से एकजुट हैं। दोनों राज्यों ने देश को चैतन्य महाप्रभु, संत तुकाराम, अहिल्यादेवी होल्कर और स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व दिए हैं।

राज्यपाल ने बंगाली गीतों और नृत्यों की उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर सोलापुर विश्वविद्यालय और उसके छात्रों को बधाई दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करने में विश्वविद्यालय के मराठी भाषी छात्रों के सराहनीय प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की।

स्वतंत्रता संग्राम में दोनों राज्यों का रहा अहम योगदान

राज्यपाल ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल दोनों ने महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान किया। बंगाल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं को जन्म दिया, वहीं महाराष्ट्र ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले और कई अन्य जैसे महान व्यक्तित्वों को देश को दिया।

उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार पश्चिम बंगाल साहित्य और संस्कृति के प्रति समर्पित है, उसी प्रकार महाराष्ट्र भी साहित्य और सांस्कृतिक उत्कृष्टता की भूमि है। बंगाल ने साहित्य और संगीत के क्षेत्र में अपार योगदान दिया है। उन्होंने प्रसिद्ध कहावत, "जो बंगाल आज सोचता है, वही भारत कल सोचता है," का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल के सपूतों ने राष्ट्र को 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' दोनों का उपहार दिया है।

राज्यपाल ने कहा कि मुंबई शहर भारत की वित्तीय राजधानी है, जबकि कोलकाता को व्यापक रूप से इसकी सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। उन्होंने बंगाली भाषा को मधुर और प्रसिद्ध रसगुल्ले की तरह मीठा बताया।

इस अवसर पर, विश्वविद्यालय के छात्रों ने दुर्गा पूजा गीत "हेलो गिरि शुनो खोबोर" प्रस्तुत किया, जो पश्चिम बंगाल के महान व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान को दर्शाने वाला एकालाप था। इसके अलावा उन्होंने लोक नृत्य और कथक प्रस्तुति भी दी।

पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर सोलापुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश महानवार, राज्यपाल के संयुक्त सचिव एस. राममूर्ति, सांस्कृतिक समन्वयक, लोक भवन के अधिकारी और कर्मचारी, तथा मुंबई के विभिन्न विद्यालयों के छात्र उपस्थित थे।

-IANS एजेंसी इनपुट

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