मुंबई डब्बावाला संकट: गैस सिलेंडर की किल्लत से थमी टिफिन सेवा की रफ्तार, डब्बावालों की आय हुई आधी
Mumbai Dabbawala in LPG Crisis: मुंबई में गैस सिलेंडर की कमी के कारण ऐतिहासिक डब्बावाला संगठन संकट में है। मेस बंद होने से टिफिन की संख्या घटी और डब्बावालों की आय आधी रह गई है।
- Written By: अनिल सिंह
LPG Crisis Impact on Mumbai Dabbawala प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
LPG Crisis Impact on Mumbai Dabbawala: मुंबई की पहचान और दुनिया भर में अपनी सटीक कार्यप्रणाली के लिए मशहूर मुंबई डब्बावाला संगठन आज एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। महानगर में अचानक गहराए गैस सिलेंडर की किल्लत ने 150 साल पुरानी इस टिफिन सेवा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि हजारों लोगों तक समय पर खाना पहुँचाने वाले डब्बावालों की आय अब घटकर आधी रह गई है।
चर्चगेट से लेकर दादर और बांद्रा तक, जहाँ सफेद गांधी टोपी पहने डब्बावाले साइकिलों पर टिफिन का अंबार लादे नजर आते थे, वहां अब सन्नाटा पसरने लगा है।
मेस और छोटे किचन पर ताले: ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट
डब्बावाला संगठन के अनुसार, उनके नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा उन ‘मेस’ और छोटे कमर्शियल किचन पर निर्भर है जो कामकाजी लोगों के लिए टिफिन तैयार करते हैं। गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई मेस बंद हो गए हैं। डब्बावालों ने बताया कि जो ग्राहक घरों से खाना बनवाते हैं, उनके टिफिन तो मिल रहे हैं, लेकिन मेस से खाना मंगवाने वाले ग्राहकों की सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। संसाधनों की कमी के कारण यह विश्वप्रसिद्ध लॉजिस्टिक सिस्टम अब लड़खड़ा रहा है।
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कुटुंब सखी और महिला शेफ की बढ़ी मुश्किलें
टिफिन तैयार करने वाली संस्था ‘कुटुंब सखी’ और अन्य महिला रसोइयों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि गैस न होने के कारण अब 100-125 लोगों के बजाय केवल 40 लोगों का खाना ही बन पा रहा है। कई जगहों पर केवल हल्का नाश्ता जैसे उपमा ही बनाया जा रहा है क्योंकि दोपहर तक गैस खत्म होने की आशंका रहती है। रसोइयों का कहना है कि ग्राहक टिफिन लेने आ रहे हैं, लेकिन गैस के अभाव में उन्हें खाली हाथ वापस भेजना पड़ रहा है।
आजीविका का संकट: सरकार से मदद की गुहार
आय आधी होने के कारण डब्बावालों के सामने अब परिवार पालने और जीविका चलाने का कड़ा संघर्ष खड़ा हो गया है। डब्बावाला संगठन ने निर्णय लिया है कि वे जल्द ही राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे ताकि गैस आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जा सके या कोई वैकल्पिक मार्ग निकाला जा सके। जो संगठन हार्वर्ड और प्रिंस चार्ल्स तक की तारीफें बटोर चुका है, वह आज अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकार की ओर देख रहा है।
