मुंबई कोस्टल रोड बना हादसों का हॉटस्पॉट, ओवरस्पीडिंग से अब तक 7 लोगों की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Mumbai Road Accident: मुंबई कोस्टल रोड पर ओवरस्पीडिंग और हादसों का खतरा बढ़ा है। अब तक 12 हादसों में 7 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे सुरक्षा मानकों और पुलिसिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
Mumbai Coastal Road becomes an accident hotspot; 7 deaths so far due to overspeeding
मुंबई कोस्टल रोड दुर्घटना सोर्स- सोशल मीडिया
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Mumbai Coastal Road Accident Hotspot: साउथ मुंबई को पश्चिमी उपनगरों से जोड़ने वाला 10.58 किलोमीटर लंबा, आठ-लेन वाला सिग्नल-फ्री मुंबई कोस्टल रोड अब हादसों का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। जिस हाई-स्पीड कॉरिडोर को यात्रा का समय घटाने और ट्रैफिक से राहत देने के लिए बनाया गया था,

वह देर रात अमीर और रसूखदार युवाओं के लिए सुपर कारों के रेसिंग ट्रैक में तब्दील हो चुका है। उद्घाटन के बाद से ढाई सालों के भीतर कोस्टल रोड पर 12 गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिनमें अब तक 7 बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है।

हाल ही में रविवार सुबह एक तेज राफ्तार बीएमडब्ल्यू के दुर्घटनाग्रस्त होने से 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इससे पहले जुलाई 2026 में ब्रीच कैंडी के पास पोर्श दुर्घटना और सितंबर 2025 में वर्ली के पास लेम्बोर्गिनी का डिवाइडर से टकराना भी इस रास्ते पर बढ़ते खतरे की गवाही देता है।

प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाईओवर से बांद्रा-वर्ली सी लिंक तक फैला यह मार्ग स्टंट और ओवरस्पीडिंग का अड्डा बन गया है। यहां निर्धारित स्पीड लिमिट 80 किमी प्रति घंटा और टर्न पर 60-40 किमी प्रति घंटा होने के बावजूद गाड़ियां अक्सर 100 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ़्तार से दौड़ती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात भर गाड़ियों का कानफोडू शोर गूंजता रहता है।

पुलिसकर्मियों को तैनात करना बेहद जोखिम भरा

इस कॉरिडोर पर पुलिसिंग करना ट्रैफिक विभाग के लिए एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेस वे की तर्ज पर बने इस मार्ग पर पुलिसकर्मियों को शारीरिक रूप से तैनात करना बेहद जोखिम भरा है।

हालांकि, सुरक्षा के लिए हाई-एंड स्पीड कैमरे और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिये ई-चालान भेजे जा रहे हैं। हाल ही में 3 सितंबर को रेसिंग का वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने 11 लग्जरी गाड़ियों को जब्त कर सख्त कार्रवाई की थी। इसके बावजूद टनल की दीवारों और बैरियर्स से तेज रफ्तार गाडियों के टकराने का सिलसिला थम नहीं रहा है।

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कोस्टल रोड पर अरबों का खर्च, बुनियादी सुविधाओं का अभाव

फिटनेस ट्रेनर हेमा वासवानी ने बाताया की इस रास्ते पर आने-जाने वाले चालकों को अक्सर जलजमाव, लीकेज और सड़क की फिसलन भरी सतह जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे गाड़ी चलाना बेहद असुरक्षित हो जाता है। आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए बनाई गई इस सड़क से ड्राइवरों को सुरक्षा और आत्मविश्वास का एहसास भी होना चाहिए।

चालकों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी

बॉम्बे हाई कोर्ट वकील लुसी मेसी ने बाताया की कोस्टल रोड पर गाड़ी चलाना अब एक गंभीर चिता का विषय बन गया है, क्योंकि यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती है और गाड़ियां फिसलती है। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित यात्रा के अधिकार से जोड़कर देखा जा सकता है। ऐसे में कड़े सुरक्षा मानकों को लागू करना सीधे तौर पर सरकार की जिम्मेदारी है।

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