Chhagan Bhujbal Case: मुंबई यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी मामले में छगन भुजबल आरोपमुक्त, कोर्ट ने दी बड़ी राहत

Chhagan Bhujbal Discharged: मुंबई की विशेष अदालत ने कलिना परिसर केंद्रीय पुस्तकालय परियोजना से जुड़े 2015 के भ्रष्टाचार मामले में एनसीपी नेता और मंत्री छगन भुजबल को आरोपमुक्त डिस्चार्ज कर दिया है।
Major relief for Chhagan Bhujbal in the Kalina Library case; discharged in the 10-year-old matter
छगन भुजबलसोर्स- सोशल मीडिया
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Mumbai Kalina Library Corruption Case: मुंबई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता छगन भुजबल को मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना परिसर में केंद्रीय पुस्तकालय परियोजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आरोपमुक्त कर दिया है।

अदालत ने मामले में अन्य आरोपियों को भी आरोपमुक्त किया। यह मामला 2015 में महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज किया गया था और करीब एक दशक से न्यायिक प्रक्रिया में था।

ACB ने क्या आरोप लगाए थे?

ACB का आरोप था कि भुजबल के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री रहते मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना परिसर की करीब चार एकड़ जमीन से जुड़ी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसी के अनुसार, विश्वविद्यालय ने जमीन का एक हिस्सा केंद्रीय पुस्तकालय के निर्माण के लिए राज्य सरकार को दिया था।

ACB के मुताबिक, 2009 में PWD ने भूखंड के एक हिस्से पर पुस्तकालय निर्माण के लिए निविदा जारी की थी। आरोप था कि शेष जमीन को एक निजी डेवलपर को 99 साल की लीज पर महज 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दिया गया। जांच एजेंसी ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान होने का आरोप लगाया था।

कथित रिश्वत और साजिश के आरोप

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि परियोजना में एक निजी डेवलपर को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया में हेरफेर किया गया और इसके बदले कथित तौर पर रिश्वत या आर्थिक लाभ लिया गया। मामले में भुजबल के साथ PWD के तत्कालीन अधिकारियों पर भी आरोप लगाए गए थे।

हालांकि, अदालत ने अभियोजन के सामने मौजूद सामग्री के आधार पर भुजबल और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने माना कि अभियोजन भुजबल की आधिकारिक कार्रवाई और कथित आपराधिक साजिश के बीच आवश्यक संबंध स्थापित नहीं कर सका।

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अप्रत्यक्ष समर्थन’ के आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं

अदालत की टिप्पणियों के अनुसार, किसी प्रशासनिक निर्णय में कथित प्रक्रियागत अनियमितता अपने आप में आपराधिक जिम्मेदारी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि कथित “अप्रत्यक्ष समर्थन” या अनुमान के आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।

विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं

विशेष अदालत का विस्तृत और कारणयुक्त आदेश अभी उपलब्ध नहीं हुआ था। इसलिए फैसले में दर्ज सभी निष्कर्षों और अदालत की विस्तृत टिप्पणियों की पूरी तस्वीर आदेश सार्वजनिक होने के बाद स्पष्ट होगी।

इस फैसले के साथ छगन भुजबल के खिलाफ ACB से जुड़े लंबित भ्रष्टाचार मामलों में यह अंतिम मामला भी समाप्त हुआ है, ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं।

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