महाराष्ट्र सरकार की लापरवाही से 17 महीने खड़ा रहा 83 करोड़ का हेलीकॉप्टर, CAG ने लगाई फटकार
CAG Report On Maharashtra Helicopter: नक्सल विरोधी अभियानों के लिए खरीदे गए 82.78 करोड़ के हेलीकॉप्टर को लेकर CAG ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई है। लापरवाही के कारण करोड़ों का अतिरिक्त फटका लगा।
- Written By: आकाश मसने
CAG ने हेलीकॉप्टर को लेकर महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार (सोर्स: सोशल मीडिया)
CAG Slams Maharashtra Government On Helicopter Loss: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने महाराष्ट्र सरकार के विमानन निदेशालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राज्य विधानसभा में पेश की गई वर्ष 2024 की अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नक्सल विरोधी अभियानों के लिए खरीदे गए 82.78 करोड़ रुपए के एक अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई। रख-रखाव के लिए एजेंसी (MRO) की नियुक्ति में हुई देरी के कारण यह हेलीकॉप्टर 17 महीने तक जमीन पर ही धूल फांकता रहा। इस ढुलमुल रवैये की वजह से राज्य सरकार के खजाने पर 2.07 करोड़ का अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ पड़ा।
10 महीने तक फाइल दबाए बैठा रहा निदेशालय
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने मई 2018 में गड़चिरोली जिले और उसके आस-पास के संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मदद और अभियानों को तेज करने के लिए हेलीकॉप्टर खरीदने की मंजूरी दी थी। इसके तहत जुलाई 2019 में विमानन निदेशालय ने जर्मनी की नामी कंपनी ‘एयरबस हेलीकॉप्टर्स’ से 82.78 करोड़ में H-145 (VT-GOV) हेलीकॉप्टर खरीदा।
चौंकाने वाली बात यह है कि हेलीकॉप्टर की डिलीवरी मिलने के बाद भी महाराष्ट्र सरकार के विमानन निदेशालय को इसके मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) के लिए एजेंसी तय करने में लगभग 10 महीने का लंबा वक्त लग गया।
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सरकार को अनावश्यक खर्च उठाना पड़ा
महाराष्ट्र सरकार द्वारा खरीदे गए 82.78 करोड़ के इस हेलीकॉप्टर को 2 दिसंबर 2020 को उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र जारी किया गया और अंततः 19 फरवरी 2021 को इसे सेवा में शामिल किया गया। यानी राज्य सरकार को सौंपे जाने के एक वर्ष 5 महीने बाद यह परिचालन में आ सका। इससे राज्य सरकार के खजाने पर 2.07 करोड़ का अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ पड़ा।
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कैग ने अपनी रिपोर्ट में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह चूक विमानन निदेशालय में अपर्याप्त योजना और कमजोर अनुबंध प्रबंधन को दर्शाती है, जिसके कारण सरकार को अनावश्यक खर्च उठाना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जुलाई 2024 में ऑडिट द्वारा मामला उठाए जाने के बाद बार-बार पत्र भेजने के बावजूद राज्य के विमानन निदेशालय ने कोई टिप्पणी नहीं की। सितंबर 2025 में यह मामला राज्य सरकार को भी भेजा गया, लेकिन रिपोर्ट तैयार होने तक उसका जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
