

Byculla Railway Overbridge Cable Sted Bridge: भायखला रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह पुल जल्द ही तैयार हो जाएगा। इसी के साथ ही इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
परियोजना का 85 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे इस पुल को दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस नए उड़ानपुल से इलाके में लगने वाले भारी ट्रैफिक का दबाव घटेगा, जबकि इसकी 2-3 लेन से सड़क क्षमता बढ़ेगी। साथ ही इस आधुनिक उड़ानपुल के शुरू होने से न केवल दशकों पुरानी यातायात की समस्या से राहत मिलेगी,
बल्कि मुंबई शहर और उपनगरों के बीच आवागमन भी बेहद सुगम हो जाएगा। इतना ही नहीं आस-पास के प्रमुख इलाकों के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
महारेल प्रशासन के मुताबिक उड़ान पुल के निर्माण कार्य के तहत रेलवे स्पैन के ऊपर केबल स्टे कार्य सहित सुपर स्ट्रक्चर तक के सभी प्रमुख काम सफलतापूर्वक निपटा लिए गए हैं। वर्तमान में केवल जॉइनिंग हिस्से का काम बाकी बचा हुआ है।
इसके अलावा दादर छोर पर एप्रोच के लिए रिइन्फोर्ड अर्थ यानी आरई वॉल का निर्माण कार्य तेज गति से जारी है, जबकि छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस छोर पर केवल आरई वॉल का काम शेष रह गया है। इन सभी कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए निर्माण टीमें लगातार जुटी हुई हैं।
भायखला में बन रहा यह पुल एक सिमेट्रिक, डुअल कैरिजवे केबल स्टेड पुल है। इसके - इंजीनियरिंग डिजाइन की खासियत इसके दो समान मुख्य स्पैन है, जो 86.5 मीटर और - 86.5 मीटर के है। पुल के दोनों तरफ दो से तीन ट्रैफिक लेन तैयार की जा रही हैं, जिससे मौजूदा सड़क की वाहन वहन क्षमता में भारी इजाफा होगा।
यह पुल भविष्य में वाहनों की बढ़ती संख्या और यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखकर आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा है। चालू सड़क यातायात के ऊपर डेक स्थापित करने के लिए आधुनिक डेक इरेक्शन - क्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे सड़क और रेल यातायात में रुकावट व ट्रैफिक ब्लॉकेज को न्यूनतम रखने में मदद मिली है।
कुल लंबाई: 916 मीटर (एप्रोच सहित)
पुल की ऊंचाई: 9।70 मीटर
पायलॉन की ऊंचाई: 50 मीटर
क्षमता: 4 लेन (मौजूदा 2 लेन से अपग्रेड)
परियोजना लागत करीब 287 करोड़
विशेष सुविधाएं : सेल्फी पॉइंट, थ्री-टियर
यूटिलिटी डक्ट सिस्टम, सजावटी एवं रिमोट-नियंत्रित एलईडी लाइटिंग
आरओबी से तेज और सुगम कनेक्टिविटी
रेलवे क्रॉसिंग की बाधाएं दूर होंगी
यात्रा समय और ट्रैफिक दबाव घटेगा
शहर व उपनगरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी
सड़क-रेल यातायात अलग होने से सुरक्षा बढ़ेगी
सब्जी मंडी के ऊपर स्टील लॉन्चिंग रही चुनौती
सेंट्रल वेजिटेबल मार्केट जैसे घने और व्यस्त इलाके में बाजार बंद या स्थानांतरित किए बिना करीब 1,500 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील की इरेक्शन और लॉन्चिंग विशेष इंजीनियरिंग तकनीकों से सफलतापूर्वक पूरी की गई।
गर्डर लॉन्चिंग और मुंबई रेलवे ट्रैक के ऊपर निर्माण के दौरान जरूरत के अनुसार ट्रैफिक ब्लॉक लिए जाएंगे। रेलवे अधिकारियों के समन्वय से ब्लॉक तय किए जाएंगे, ताकि निर्माण के साथ ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन भी प्रभावित न हो।
रेलवे क्रॉसिंग पर निर्वाध रास्ता मिलने से समय और ईंधन की बचत होगी। फीडर सड़कों और प्रमुख चौराहों पर यातायात दबाव घटने से जाम कम होगा। सड़क और रेल यातायात अलग होने से हादसों के संभावित बिंदु घटेंगे, जबकि बेहतर कनेक्टिविटी से दैनिक यात्रियों का सफर तेज, सुरक्षित और सुगम होगा।