बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पुराने टैक्स रिफंड पर करदाताओं को मिली बड़ी राहत
Bombay High Court ने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि सेटलमेंट योजना के तहत बकाया चुकाने के बाद करदाताओं का पुराना रिफंड रोकना गलत है। अदालत ने सरकार को राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।
- Written By: अपूर्वा नायक
बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Settlement Scheme Tax Relief: सेटलमेंट योजना के तहत पुराना टैक्स चुकाने वाले करदाताओं को ‘हाई’ (बड़ी) राहत देनेवाला एक ऐतिहासिक फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाया है। तो वहीं यह फैसला सुनाने के दौरान कोर्ट ने सरकार को जबरदस्त लताड़ भी लगाई है।
फैसले से राज्य के हजारों करदाताओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रेसिडेंट ट्रेड एंड एक्सिम कॉर्पोरशन कंपनी का वित्त वर्ष 2007-08 का लगभग 33।29 लाख का टैक्स रिफंड सरकार के पास लंबित था।
इसी बीच पुराने कर विवादों को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने महाराष्ट्र सेटलमेंट ऑफ एरियर्स स्कीम 2023 योजना लागू कर दी। कंपनी ने इस योजना का लाभ उठाते हुए वित्त वर्ष 2008-09 और 2009-10 की कर बकाया चुकाने के लिए आवेदन किया और नियमानुसार 20 प्रतिशत राशि जमा भी कर दी।
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यह निर्णय केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। जो भी करदाता सेटलमेंट या एमनेस्टी योजना का लाभ उठा चुके हैं और जिनका पुराना रिफंड सरकार के पास अटका है, उन सभी के लिए यह फैसला एक मजबूत कानूनी ढाल बन सकता है।
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महाराष्ट्र सरकार ने किया गलत काम
- बिक्री कर विभाग ने कंपनी का 2007-08 का पुराना रिफंड सीधे 2008-09 की बकाया राशि से समायोजित कर दिया और रिफंड देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
- मामले में न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि सेटलमेंट योजना एक स्वतंत्र कानून है। एक बार करदाता इसके तहत बकाया चुका दे तो उसे उस दायित्व से मुक्त माना जाएगा। ऐसे में पुराना रिफंड बकाया से जोड़ना योजना के उद्देश्य के विरुद्ध है।
- इसी के साथ न्यायालय ने 18 अप्रैल 2024 को कर विभाग द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया।
इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि कंपनी का 33।29 लाख का रिफंड ब्याज सहित दो सप्ताह के भीतर उनके खाते में जमा किया जाए।
