बॉम्बे हाईकोर्ट का हंटर: मुंबई के सभी फेरीवालों का होगा वेरिफिकेशन, बांग्लादेश के घुसपैठियों पर शिकंजा

Bombay High Court Hawker Verification: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में अवैध फेरीवालों के वेरिफिकेशन और विदेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट करने का आदेश दिया है। केवल 99,000 पात्र ही लगा सकेंगे फेरी।
Bombay High Court Hawker Verification
Bombay High Court Hawker Verification (डिजाइन फोटो)
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Hawker Verification: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (23 मार्च, 2026) को मुंबई की सड़कों और फुटपाथों पर अवैध रूप से काबिज फेरीवालों को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और मुंबई पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शहर के सभी फेरीवालों और उनके सहायकों के पहचान पत्रों का सघन सत्यापन करें।

जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने साफ किया कि यदि इस जांच के दौरान कोई भी व्यक्ति 'अवैध प्रवासी' पाया जाता है, तो उसे तुरंत डिपोर्ट करने (वापस भेजने) समेत कानून के दायरे में आने वाली तमाम कठोर कार्रवाइयां की जाएं।

अवैध प्रवासियों पर प्रहार: पहचान का होगा वेरिफिकेशन

बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिनमें फुटपाथों पर अवैध कब्जे के कारण पैदल यात्रियों को होने वाली भारी असुविधा का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने बीएमसी और पुलिस को निर्देश दिया कि वे फेरीवालों के साथ-साथ उनके यहां काम करने वाले सहायकों की भी पहचान सुनिश्चित करें। विशेष रूप से उन लोगों की जांच करने को कहा गया है जिन पर बांग्लादेशी या गैर-भारतीय होने का संदेह है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर व्यवसाय करने की आड़ में विदेशी घुसपैठ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अवैध पाए जाने पर उन्हें उनके देश वापस भेजा जाना चाहिए।

सिर्फ 99,000 पात्र फेरीवालों को ही मिलेगी अनुमति

अदालत ने नगर निकाय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुंबई में लगभग 99,000 फेरीवालों को ही वैध रूप से पात्र पाया गया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि बीएमसी केवल इन 99,000 लोगों को ही निर्धारित नियमों के तहत व्यवसाय करने की अनुमति दे। इन पात्र लोगों के अलावा यदि कोई भी अन्य व्यक्ति सड़क या फुटपाथ पर फेरी लगाता हुआ पाया जाता है, तो उसे बिना किसी देरी के तुरंत हटाया जाए। बेंच ने बीएमसी को सड़कों और फुटपाथों पर स्थित स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की दुकानों की व्यापक जांच करने का जिम्मा सौंपा है।

फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करने का संकल्प

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए हैं और उन पर किसी भी तरह का अनधिकृत कब्जा नहीं होना चाहिए। बीएमसी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि कोई भी दुकान या फेरीवाला वाहनों की आवाजाही या पैदल यात्रियों के रास्ते में बाधा न बने। इस फैसले से मुंबई के व्यस्त इलाकों जैसे दादर, अंधेरी और कोलाबा में फुटपाथों के खाली होने की उम्मीद जगी है। नागरिक समूहों ने कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है, क्योंकि इससे शहर की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था दोनों में सुधार होगा।

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