बीएमसी का कामकाज ठप, नहीं किया गया दिशा-निर्देश जारी
- Written By: ओम प्रकाश
मुंबई: मुंबई महानगरपालिका में प्रशासक (Administrator) बैठकर एक सप्ताह बीतने के बाद भी काम काज शुरु नहीं किया जा सका है। छोटे कार्य के अलवा बीएमसी (BMC) के महत्वपूर्ण काम ठप हो गए हैं। बीएमसी में नियुक्ति किए प्रशासक अभी इस उलझन में हैं कि काम कैसे किया जाए क्योंकि कार्य को लेकर कोई दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी नहीं किया गया है। कोई निर्णय नहीं लेने की वजह से बीएमसी के अधिकारी भी उहापोह की स्थिति में हैं।
राज्य की महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार ने बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल (BMC Commissioner Iqbal Singh Chahal) को प्रशासक नियुक्त किया है। उन्हें बीएमसी के कामकाज की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन अभी तक बीएमसी का कामकाज शुरु नहीं हो सका है। बीएमसी सूत्रों के अनुसार, बीएमसी के प्रशासक अभी इसी उलझन में हैं कि काम को कैसे आगे बढ़ाया जाए। वे बीएमसी अधिकारियों की कमेटी बना कर काम करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से केवल उन्हें ही संपूर्ण जिम्मेदारी दी है। कमेटी बनाने के लिए नियमों में संशोधन करना पड़ेगा।
1984-85 में भी बीएमसी पर प्रशासक की हुई थी नियुक्ति
इससे पहले 1984-85 के दौरान बीएमसी पर प्रशासक की नियुक्ति हुई थी। उस समय केवल प्रशासक और बीएमसी सचिव के हस्ताक्षर से बीएमसी के प्रस्ताव पास किए जाते थे। नवी मुंबई और दूसरी महानगरपालिकाओं में इसी तरह काम चल रहा है, लेकिन वर्तमान प्रशासक विभिन्न समितियों की होने वाली बैठकों में जो प्रस्ताव पास किए जाते थे। उसी अनुसार राजनीतिक पार्टियों के सुझाव के अनुसार काम करने पर विचार कर रहे हैं। बीएमसी कमिश्नर अधिकारियों की आंतरिक कमेटी बना कर काम करना चाहते हैं, लेकिन सवाल उठाता है कि जो अधिकारी प्रस्ताव बना कर भेजेगा उस पर कैसे आक्षेप लगाया जा सकता है।
सम्बंधित ख़बरें
BMC Pet Animal Cremation: मुंबई में पालतू पशुओं के लिए आधुनिक दहन सुविधा शुरू, ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध
आदित्य ठाकरे पर बेबुनियाद आरोप से भड़की प्रियंका चतुर्वेदी, अरविंद सावंत ने संसद में किया पलटवार
महिला आरक्षण पर उद्धव ठाकरे का ‘मास्टरस्ट्रोक’: ‘2023 में ही पारित हो गया विधेयक, तो लागू करने में देरी क्यों?
‘ये बालासाहेब के संस्कार हैं, हमने उन्हें खरीदा नहीं’, किशोरी पेडनेकर के बयान से मचा हड़कंप
अधिकारियों में भी कन्फ्यूजन
बीएमसी भंग होने से पहले बीएमसी कमिश्नर के हस्ताक्षर से ही स्थायी समिति में प्रस्ताव भेजा जाता था। कमिश्नर ही प्रशासक हैं उनके दवारा गठित समित के अधिकारी कैसे उनके निर्णय पर सवाल उठा सकता है। फिलहाल इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिए जाने से अधिकारियों में भी कन्फ्यूजन हैं, जबकि बीएमसी का कामकाज भी ठप पड़ गया है। अब तक स्थायी समिति की तरफ से पास किए गए प्रस्ताव पर ही काम आगे बढ़ रहा है।
