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Mumbai Property Tax Recovery News: बीएमसी की सभा में मंगलवार को प्रॉपर्टी टैक्स वसूली को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। नगरसेवकों ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आम नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, जबकि बड़े बिल्डरों और सरकारी एजेंसियों पर बकाया टैक्स की वसूली में ढिलाई बरती जाती है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि सामान्य मुंबईकर यदि प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरते हैं, तो उनकी संपत्तियां सील कर दी जाती हैं और नीलामी तक की कार्रवाई होती है। वहीं, म्हाडा और एमएमआरडीए जैसी बड़ी संस्थाओं पर हजारों करोड़ रुपये बकाया होने के बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। कांग्रेस नगरसेवक राजा रहबर खान ने इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि गरीबों पर सख्ती और बड़े संस्थानों पर नरमी अनुचित है।
दीक्षा कारकर ने सीएफसी केंद्रों के बंद रहने पर चिंता जताते हुए कहा कि मार्च महीने में 7,100 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा करने के लिए इन केंद्रों का नियमित संचालन जरूरी है। सचिन पडवल ने भी मांग की कि एमएमआरडीए और म्हाडा पर वही नियम लागू किए जाएं जो आम करदाताओं पर लागू होते हैं।
कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने कहा कि मुंबई देश में सबसे ज्यादा कर देने वाला शहर है और बीएमसी नागरिकों को पानी, सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इसलिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन शुल्क का 1 प्रतिशत हिस्सा बीएमसी को दिया जाना चाहिए, उन्होंने यह भी मांग की कि जिन बिल्डरों पर टैक्स बकाया है, उनके चालू प्रोजेक्ट्स से वसूली की जाए और एक समान कर नीति तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाए, इस मुद्दे पर भाजपा सदस्यों ने बीएमसी को और अधिक सक्षम बनाने तथा निजी लेआउट क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया।
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महापौर रितु तावड़े ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स वसूली एक संवेदनशील विषय है और प्रशासन नागरिकों को परेशान किए बिना वसूली का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से करदाताओं को सूचना दी जा रही है तथा समय पर टैक्स भरने वालों को छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं, यूबीटी नगरसेवक विशाखा राउत ने घरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाले रजिस्ट्रेशन शुल्क का 1 प्रतिशत बीएमसी को देने की माग उठाई, उनका कहना है कि इससे कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मजबूती मिलेगी, मनपा सदन के नेता गणेश खणकर ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे राज्य सरकार के पास भेजने की बात कही।