मुंबई में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट मामले की सख्ती से आम जनता बेहाल: विदेश जाने वाले छात्र परेशान, BMC में हंगामा

Mumbai BMC News: बीएमसी की फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों पर सख्ती से आम नागरिक परेशान। विदेश जाने वाले छात्रों और वीजा आवेदकों के काम अटके, महासभा में उठा वार्ड स्तर पर अधिकार देने का मुद्दा।
BMC's crackdown on fake birth certificates causes delays for foreign visa applicants; leaders demand restoring correction powers at ward level to ease backlog.
मुंबई बीएमसी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Mumbai Fake Birth Certificate Row: मुंबई बीएमसी की तरफ से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र रैकेट पर की गई सख्ती का असर अब वास्तविक नागरिकों पर भी पड़ने लगा है। सोमवार को बीएमसी की महासभा में विभिन्न दलों के नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि जन्म प्रमाणपत्र में सुधार (करेक्शन) की प्रक्रिया में अत्यधिक देरी के कारण उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों और वीजा आवेदकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महासभा में इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा हुई।

नगरसेवकों ने मांग की कि वार्ड स्तर पर जन्म प्रमाणपत्र संशोधन की सुविधा तत्काल बहाल की जाए तथा लंबित आवेदनों का तय समय सीमा के भीतर निपटारा सुनिश्चित किया जाए। विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र घोटाले के बाद ईमानदार नागरिकों को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की सख्ती के कारण निर्दोष लोग 'बलि का बकरा' बन गए हैं।

नगरसेवकों ने रखा प्रस्ताव

वहीं भाजपा नगरसेवक नील सोमैया, जिन्होंने यह प्रस्ताव रखा उन्होंने कहा कि जन्म पंजीकरण और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया का समय-समय पर ऑडिट कराने की मांग की। उनका कहना था कि इससे व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर किया जा सकेगा, सत्यापन प्रक्रिया मजबूत होगी और भविष्य में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। कांग्रेस नगरसेविका अजंता यादव ने कहा कि वार्ड कार्यालयों में जन्म प्रमाणपत्र में सुधार कराने वालों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

कई आवेदकों को छह महीने से लेकर एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस देरी से छात्रों, नौकरी के इच्छुक युवाओं और विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

एसआईटी कर रही जांच

मुंबई नगरसेवकों के सवालों का जवाब देते हुए अतिरिक्त मनपा आयुक्त विपिन शर्मा ने बताया कि बिना अनिवार्य दस्तावेजों के जारी किए गए करीब 19,700 जन्म प्रमाणपत्रों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पालिका कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।

उन्होंने बताया कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को वर्ष 2016 में एसएपी प्लेटफॉर्म से सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पर स्थानांतरित किया गया था, जबकि जन्म प्रमाणपत्र में संशोधन की सुविधा जनवरी 2024 से शुरू हुई।

लगभग 90,000 जन्म प्रमाणपत्रों में सुधार किया जा चुका है। विपिन शर्मा ने कहा कि दुरुपयोग रोकने के लिए संशोधन की मंजूरी का अधिकार कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारियों (ईएचओ) के पास केंद्रीकृत किया गया था।

बढ़ती शिकायतों को देखते हुए मुंबई बीएमसी ने रजिस्ट्रार जनरल से वार्ड स्तर पर पुनः संशोधन अधिकार बहाल करने का अनुरोध किया है। साथ ही वर्ष 1960 से अब तक के जन्म रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है, जिससे सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी और नागरिकों को जन्म प्रमाणपत्र में सुधार के लिए कम समय तक इंतजार करना पड़ेगा।

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