मुंबईकरों को मिलेंगे 3 नए BMC अस्पताल, 1120 बेड बनकर तैयार! लेकिन निजीकरण पर छिड़ा सियासी संग्राम

Mumbai New Hospitals: मुंबई के उपनगरों में 1,120 बेड वाले 3 नए बीएमसी अस्पताल बनकर तैयार हैं। हालांकि, इनके शुरू होने से पहले ही इनके संभावित निजीकरण को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने मोर्चा खोल दिया है।
BMC New Hospitals In Mumbai
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
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BMC New Hospitals In Mumbai: मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में रहने वाले नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के मोर्चे पर राहत भरी खबर आई है। गोरेगांव, कांदिवली और बोरीवली में बीएमसी के तीन नए अस्पताल बनकर तैयार हैं। इन अस्पतालों का निर्माण 85 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इनके शुरू होने पर शहर को करीब 1,120 नए अस्पताल बेड मिलेंगे।

प्रमुख अस्पतालों पर मरीजों का दबाव होगा कम

गोरेगांव, कांदिवली और बोरीवली में बनाए गए तीनों अस्पतालों में कुल 1,120 बेड उपलब्ध होंगे। इनमें गोरेगांव के सिद्धार्थ अस्पताल में 306, कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में 324 और बोरीवली के भगवती अस्पताल में 490 बेड होंगे। इनके शुरू होने से केईएम, नायर, सायन, कूपर और राजावाड़ी जैसे प्रमुख मनपा अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होने की उम्मीद है।

अस्पतालों के उद्घाटन से पहले छिड़ा सियासी संग्राम

हालांकि, अस्पतालों के संचालन से पहले ही इन अस्पतालों के संचालन को लेकर राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) ने इनके संभावित निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने मांग की है कि इनका संचालन केवल बीएमसी के माध्यम से ही किया जाए।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर ने पार्टी नेताओं के साथ गोरेगांव स्थित सिद्धार्थ अस्पताल, कांदिवली पश्चिम के शताब्दी अस्पताल और बोरीवली पश्चिम के भगवती अस्पताल का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और मनपा प्रशासन अस्पतालों का प्रबंधन निजी एजेंसियों को सौंपकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण करना चाहते हैं।

BMC के अधीन ही हो संचालन

किशोरी पेडणेकर ने कहा कि करीब 500 करोड़ रुपए की लागत से बने तीनों अस्पताल अंतिम चरण में है और अब केवल हस्तांतरण की प्रक्रिया शेष है। उन्होंने कहा कि ये अस्पताल करदाताओं के पैसे से बने हैं, इसलिए इनका संचालन भी बीएमसी के अधीन ही होना चाहिए, ताकि आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके।

अस्पतालों में इन कमियों को लेकर जताई चिंता

निरीक्षण के दौरान शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडणेकर ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस के जरिए दवाओं की खरीद में हो रही देरी, शताब्दी अस्पताल में पीपीपी मॉडल के तहत संचालित 13 वर्ष पुरानी एमआरआई मशीन के बार-बार खराब होने और नर्सिंग स्टाफ की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नए अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों, पैरामेडिकल और सफाई कर्मचारियों की शीघ्र नियुक्ति की जाए। उन्होंने बीएमसी से भर्ती संबंधी लंबित मंजूरियों में तेजी लाकर अस्पतालों को जल्द जनता के लिए शुरू करने की मांग की।

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