

Mumbai BMC Malaria Mega Blood Testing Campaign: मुंबई में मलेरिया पर नियंत्रण के लिए मनपा की ओर से खून की 'मेगा' जांच हो रहा है। फिर भी संक्रण बेकाबू नजर आ रहे हैं। वर्ष 2025 में 18.89 लाख से अधिक रक्त नमूनों की जांच की गई, जो 2024 की तुलना में 24.5 प्रतिशत अधिक है।
इसके बावजूद मलेरिया के पॉजिटिव मरीजों की संख्या 16.7 प्रतिशत बढ़कर 10,163 हो गई। साथ ही, 2015 से 2025 के बीच 2025 में वार्षिक परजीवी संक्रमण दर 0.8 पर पहुंची, जो इस दशक की सर्वाधिक दर है। आंकड़े बताते हैं कि जांच बढ़ने के बावजूद मलेरिया का संक्रमण कम नहीं हुआ है।
मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 18 लाख 89 हजार 12 खून के नमूनों की जांच की गई। 2024 में यह संख्या 15 लाख 16 हजार 655 थी। इस तरह एक वर्ष में खून के जांच का प्रमाण 24.5 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि, जांच बढ़ने के बावजूद मलेरिया के पॉजिटिव मरीज कम नहीं हुए।
इसके उलट 2024 के 8,710 पॉजिटिव मरीजों की संख्या 2025 में बढ़कर 10,163 हो गई। ऐसे में 1,453 मरीजों के साथ 16.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019 में मलेरिया के पॉजिटिव मरीजों की संख्या घटकर 4,357 रह गई थी। 2022 में इसमें और कमी आई और यह आंकड़ा 3,985 तक पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद मलेरिया के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2023 में 7,319, 2024 में 8,710 और 2025 में 10,163 पॉजिटिव मरीज सामने आए। वर्ष 2026 में जून तक 7 लाख 61 हजार 439 खून के नमूनों की जांच में 3,394 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। हालांकि, यह छह महीने का आंकड़ा है, इसलिए इसकी पूरे वर्ष के आंकड़ों से सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा।
आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण संकेतक यह है कि वर्ष 2024 में वार्षिक खून की जांच दर 11.7 से बढ़कर 2025 में 14.5 हो गई। इसी अवधि में एपीआई 0.6 से बढ़कर 0.8 हो गया, जबकि मुंबई मलेरिया के लिए जांचे गए खून के नमूनों में से 0.5 मलेरिया के लिए पॉजिटिव पाए गए। इसलिए केवल जांच बढ़ने से ही पॉजिटिव मरीज बढ़े, इस तरह की कोई तस्वीर नहीं है।