BMC चुनाव 2025: मुंबई के 227 वार्डों में चुने जाएंगे पार्षद, मतदाता बनेंगे असली खिलाड़ी
BMC Elections Notification: मुंबई में BMC चुनावी जंग का बिगुल बज चुका है। 227 वार्डों की नई सीमाएं तय होते ही सियासी दलों की धड़कनें तेज हो गईं। अब हर वार्ड से एक पार्षद चुना जाएगा
- Written By: सोनाली चावरे
बृहन्मुंबई नगर निगम (pic credit; social media)
Brihanmumbai Municipal Corporation: मुंबई की सियासत का सबसे बड़ा दंगल अब सामने है। बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी चुनाव को लेकर सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार मुंबई को कुल 227 वार्डों में बांटा गया है और हर वार्ड से एक पार्षद चुना जाएगा। अधिसूचना जारी होते ही शहर की राजनीति में हलचल मच गई है।
यह अधिसूचना मुंबई नगर निगम अधिनियम 1888 की धारा 5 और 19 के तहत जारी की गई है। राज्य चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद इसे सार्वजनिक किया गया। इससे पहले 22 अगस्त 2025 को मसौदा वार्ड संरचना पर आपत्तियाँ और सुझाव मांगे गए थे, जिनकी समीक्षा के बाद ही अंतिम फैसला लिया गया।
हर वार्ड की सीमा और उसमें रहने वाली जनसंख्या का पूरा ब्योरा सरकार ने उपलब्ध करा दिया है। यह जानकारी पार्टियों के लिए बेहद अहम है क्योंकि अब उन्हें पता है कि कहां ज्यादा मतदाता हैं और कहां उनका जनाधार कमजोर है। यही कारण है कि राजनीतिक दल अब से ही अपने उम्मीदवारों का चयन और चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
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मुंबई जैसे महानगर में बीएमसी चुनाव सिर्फ स्थानीय राजनीति नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की सियासत को प्रभावित करता है। बीएमसी के पास हजारों करोड़ का बजट है और शहर की हर गली, हर मोहल्ले का विकास इसी चुनाव से तय होता है। यही वजह है कि हर पार्टी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर मैदान में उतरती है।
वार्ड सीमांकन से आम नागरिकों पर भी सीधा असर पड़ेगा। अब हर वार्ड से एक पार्षद जनता की आवाज बनेगा। स्थानीय समस्याओं को सीधे उनके प्रतिनिधि तक पहुंचाने का मौका लोगों को मिलेगा। पानी, सड़क, सीवेज और सफाई जैसे मुद्दों पर जनता अपने पार्षद से जवाब मांग सकेगी।
अधिसूचना जारी होते ही शहर में चुनावी माहौल गरम हो गया है। राजनीतिक दल एक-एक वार्ड का अध्ययन कर रहे हैं और सोशल इंजीनियरिंग का गणित बिठाने में जुटे हैं। कौन सा वार्ड किस पार्टी के लिए आसान होगा और कहां टक्कर कड़ी होगी, इसकी पड़ताल अभी से शुरू हो चुकी है।
मुंबई अब एक बार फिर चुनावी जंग के लिए तैयार है। मतदाता तय करेंगे कि आने वाले पांच सालों तक उनके शहर का भाग्य किसके हाथ में रहेगा।
