‘जो हिंदुत्व के नहीं हुए वे मराठी…’, BMC चुनाव से पहले मुंबई में लगे विवादित बैनरों से मचा बवाल
BMC Election से पहले मुंबई में हिंदुत्व और मराठी मुद्दे को लेकर विवादित बैनर लगे हैं। इन बैनरों के ज़रिए शिवसेना (ठाकरे गुट) और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा गया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
- Written By: आकाश मसने
मुंबई में लगे विवादित बैनर (सोर्स: सोशल मीडि)
Mumbai Controversial Banner News: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। राज्य की सभी नगर पालिकाओं के लिए चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। शुरुआती चर्चाएं, नेताओं के इंटरव्यू, संभावित गठबंधन और रणनीतियों को लेकर मंथन का दौर शुरू हो गया है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच मुंबई में लगाए गए कुछ बैनरों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
मुंबई के अलग-अलग इलाकों में ऐसे बैनर लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है “जो हिंदुत्व के साथ खड़े नहीं हुए, वे मराठी लोगों के लिए क्या करेंगे? मुंबई वालों, जागो, एक परिवार की चालों में मत फंसो।” इन बैनरों ने शहर में चर्चा का माहौल बना दिया है और लोग इसे आगामी BMC चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
ठाकरे भाइयों पर निशाना!
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इन बैनरों के जरिए शिवसेना (यूबीटी) और खुद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को निशाना बनाया गया है। ‘हिंदुत्व’ और ‘मराठी अस्मिता’ जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर दिया गया संदेश सीधे तौर पर ठाकरे बंधुओं की राजनीति पर सवाल खड़ा करता नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि BMC चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस तरह का संदेश सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया है।
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बैनर किसके, यह रहस्य बना हुआ
हालांकि, इन बैनरों को किस राजनीतिक दल या संगठन ने लगवाया है, इसका कहीं भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है। बैनर पर न तो किसी पार्टी का नाम है और न ही किसी नेता या संगठन की पहचान। इसी वजह से यह मामला और अधिक रहस्यमय बन गया है और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
चुनावी रणनीति का हिस्सा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले इस तरह के बैनर एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। मुंबई महानगरपालिका पर लंबे समय तक शिवसेना का वर्चस्व रहा है और अब बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच हर दल अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। ऐसे में हिंदुत्व और मराठी मुद्दों को उभारकर मतदाताओं को साधने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, इन बैनरों को लेकर न तो किसी पार्टी ने जिम्मेदारी ली है और न ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, लेकिन इतना तय है कि BMC चुनाव से पहले मुंबई की राजनीति और अधिक गर्माने वाली है।
बीएमसी ने हटाए पोस्टर
इधर आचार संहिता होने के एक दिन बाद BMC ने पूरे शहर में अवैध राजनीतिक विज्ञापनों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू की और मंगलवार को 2,103 अनाधिकृत होर्डिंग्स हटा दिए। इस कार्रवाई में अवैध राजनीतिक होर्डिंग्स, बैनर, कियोस्क, स्टिकर, साइन और झंडे हटाए गए, जिन्हें बिना इजाजत के लगाया गया था।
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इस अभियान के तहत सिविक अधिकारियों ने 364 दीवारों पर बने विज्ञापनों पर सफेदी भी की। एक सिविक अधिकारी ने बताया कि अब से सिर्फ उन्हीं विज्ञापनों को इजाजत दी जाएगी जिन्हें आधिकारिक तौर पर मंजूरी मिली है और जिनका हिसाब चुनाव खर्च में शामिल किया गया है।
अतिरिक्त नगर आयुक्त (शहर) अश्विनी जोशी ने कहा कि यह कार्रवाई मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट के उल्लंघन को रोकने के लिए की गई थी और आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी। उप नगर आयुक्त (विशेष) चंदा जाधव ने भी ज़ोर देकर कहा कि प्रमुख चौराहों, मुख्य सड़कों, सार्वजनिक जगहों और सरकारी परिसरों से अवैध होर्डिंग्स और बैनर हटाने का अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।
