बार-बार बढ़ जाता है गरीब नगर, अब रेलवे ने चलाया बुलडोजर, सैकड़ों झोपड़ों को ढहाया
Gareeb Nagar Slum News: बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास गरीब नगर झोपड़पट्टी पर पश्चिम रेलवे ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़ी तोड़क कार्रवाई की।
- Written By: आंचल लोखंडे
Mumbai Encroachment (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Encroachment News: बांद्रा रेलवे स्टेशन के पूर्व में पटरियों से सटी गरीब नगर झोपड़पट्टी पर मंगलवार को पश्चिम रेलवे प्रशासन ने बड़ी तोड़क कार्रवाई की। मुंबई हाईकोर्ट के 29 अप्रैल 2026 के आदेश और सर्वोच्च न्यायालय की मुहर के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें तीन से चार मंजिलोंवाले सैकड़ों अनधिकृत झोपड़ों को जेसीबी की मदद से जमींदोज कर दिया गया।
नौ साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद कार्रवाई
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई। सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत कार्यवाही 2017 से पहले ही शुरू हो चुकी थी और 27 नवंबर 2017 को बेदखली के आदेश पारित किए गए थे। लगभग नौ वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने अनधिकृत अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी। रेलवे ने यह भी बताया कि संयुक्त सर्वेक्षण में पात्र पाए गए लगभग 100 झोपड़ों को सुरक्षित रखा जाएगा, उन्हें नहीं तोड़ा जाएगा।
सुरक्षा के लिए जरूरी है अतिक्रमण हटाना
पश्चिम रेलवे के अनुसार, यह इलाका रेलवे सुरक्षा क्षेत्र में आता है, जहां अनधिकृत बस्ती से न केवल मानव जीवन को खतरा है बल्कि रेल संचालन भी प्रभावित होता है। यह क्षेत्र मुंबई की व्यस्ततम रेल लाइनों में से एक पर क्षमता विस्तार के लिए अत्यंत जरूरी है। अतिक्रमण हटने के बाद अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। कार्रवाई में लगभग 400 कर्मचारी तैनात किए गए और पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल के साथ-साथ एम्बुलेंस व अग्निशमन दल भी मौके पर मौजूद रहे। यह कार्रवाई 23 मई तक जारी रहेगी।
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बार-बार आबाद होती बस्ती पर सवाल
इस बस्ती का इतिहास काफी विवादित रहा है और यहां रहने वाले लोगों की नागरिकता पर भी हमेशा सवाल उठते रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में गरीब नगर में तीन बार भीषण आग लग चुकी है और कम से कम पांच बार बड़ी तोड़क कार्रवाई हो चुकी है। अतीत में यहां के पात्र झोपड़ा धारकों को कम से कम दो बार वैकल्पिक मकान आवंटित किए जाने का दावा भी किया जा रहा है।
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फिर भी यह बस्ती हर बार पहले से अधिक ऊंची और बड़े क्षेत्रफल में फिर से आबाद हो जाती है। इस स्थिति को देखकर स्थानीय लोग और यात्री प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वो कौन सी ताकतें हैं जो इस बस्ती को बार-बार बसा देती हैं। लोग बार-बार होने वाली तोड़क कार्रवाई पर बरबाद होने वाले लाखों रुपए पर भी नाराजगी जता रहे हैं कि जब ये अवैध झोपड़े बनते और बढ़ते हैं, तब प्रशासनिक अधिकारी कहां सोए रहते हैं?
किरीट सोमैया ने किया था आंदोलन
इस बस्ती के लोग रेल पटरियों के बीच भेड़ बकरियां पालते थे। बच्चे पटरियों के पास खेलते थे। विवाद व अन्य समारोहों का आयोजन पटरियों के बीच किया जाता था। एक विदेशी यू ट्यूबर ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
(इनपुट: जितेंद्र मल्लाह)
