बांद्रा ईस्ट में रेलवे का महा-अभियान: ‘गरीब नवाज़’ बस्ती की 4 मंजिला अवैध झुग्गियों पर चला कोर्ट का बुलडोजर
Bandra East Gareeb Nagar Slum Demolition Railway: बांद्रा ईस्ट के गरीब नगर में रेलवे की जमीन पर बनी 140 बहुमंजिला अवैध झुग्गियों को बुलडोजर से किया गया ध्वस्त। 1000 पुलिसकर्मी तैनात।
- Written By: अनिल सिंह
बांद्रा ईस्ट गरीब नवाज़ बस्ती में अवैध झुग्गियों को तोड़ा गया (फोटो क्रेडिट-X)
Gareeb Nagar Bandra East Demolition: मुंबई के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक, बांद्रा ईस्ट के बाहर मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब रेलवे सुरक्षा बल और मुंबई पुलिस की भारी टुकड़ियों ने पूरे ‘गरीब नगर’ इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। कई बार कानूनी नोटिस जारी करने और बार-बार की गई अपीलों के बावजूद जब निवासियों ने रेलवे की जमीन से कब्जा नहीं हटाया, तो प्रशासन ने छह बड़े बुलडोजरों के साथ तड़के ही कार्रवाई शुरू कर दी। चौंकाने वाली बात यह थी कि जिन्हें कागजों पर ‘झुग्गियां’ कहा जा रहा था, वे असल में कंक्रीट और सीमेंट से बनी तीन से चार मंजिला अवैध मिनी-इमारतें थीं, जो रेल पटरियों के बिल्कुल करीब खड़ी थीं।
पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम पूरी तरह से माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार उठाया गया है।
Bulldozer operations have been underway since this morning in the Garib Nagar area near #Mumbai‘s #Bandra East Railway Station. A joint team of Western Railway, BMC, and Mumbai Police is engaged in removing illegal encroachments and slums built on railway land.
1/5 pic.twitter.com/obF3Tw9IIs — Siraj Noorani (@sirajnoorani) May 19, 2026
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जमीन का अतिक्रमण मुक्त होना अनिवार्य था
बांद्रा ईस्ट क्षेत्र में नई रेलवे लाइनों के विस्तार और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए एक नया रेल मार्ग बनाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए इस पूरी जमीन का अतिक्रमण मुक्त होना अनिवार्य था। सुरक्षा कारणों और यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस पूरे अभियान के दौरान बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन से जुड़ने वाले दो प्रमुख फुटओवर ब्रिजों (पुलों) को आम जनता के लिए बंद रखा गया था।
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तनाव के बीच लोगों ने खुद खाली किए घर
रेलवे की इस अचानक और कड़क कार्रवाई को देखते हुए गरीब नवाज़ बस्ती के कई निवासियों ने सुबह बुलडोजर चलने से पहले ही अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया था। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों के भीतर भारी आक्रोश और आंसू देखने को मिले। बेघर हुए निवासियों का आरोप है कि उन्हें इस अचानक की गई कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और मानसून की आहट से ठीक पहले 140 परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस विध्वंस के बदले सरकार उन्हें तुरंत वैकल्पिक आवास (पुनर्वास) मुहैया कराए।
1000 सुरक्षाकर्मियों का अभेद्य पहरा
गरीब नगर इलाका पूर्व में भी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाइयों के दौरान हिंसक झड़पों और आगजनी की घटनाओं के लिए संवेदनशील रहा है। इसी इतिहास को भांपते हुए इस बार प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लिया। मुंबई पुलिस के आला अधिकारियों की निगरानी में दंगा नियंत्रण बल और आरपीएफ के 1000 से अधिक अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवानों ने पूरे इलाके में मार्च किया। भारी सुरक्षा घेरे के कारण स्थानीय लोग विरोध तो दर्ज कराते रहे, लेकिन कोई भी कानून व्यवस्था को हाथ में लेने की हिम्मत नहीं कर सका। रेलवे का यह विध्वंस अभियान बुधवार को भी जारी रहेगा।
