जैसी करनी वैसी भरनी, समुद्र ने मुंबई को दिया 2500 मीट्रिक टन कचरे का गिफ्ट, कूड़ों से पटी चौपाटी

Mumbai Beach Garbage: अरब सागर ने मुंबई को लौटाया 2500 मीट्रिक टन कचरा। जुहू चौपाटी पर सबसे ज्यादा 1824 MT कूड़ा जमा, BOD स्तर हुआ खतरनाक।
Mumbai Beach Garbage
अरब सागर ने मुंबई को लौटाया 2,500 मीट्रिक टन कचरा (फोटो क्रेडिट-X)
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Mumbai Beach Garbage Arabian Sea Waste Return: "जैसी करनी वैसी भरनी" कहावत उस वक्त बिल्कुल सच साबित हो गई, जब इस मानसून सीजन में अरब सागर ने मुंबई के नागरिकों द्वारा नालों में फेंका गया करीब 2,500 मीट्रिक टन कूड़ा-कचरा वापस समुद्र तटों पर ला पटका। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अनुसार, खुले नालों और गटरों में लापरवाही से फेंका गया प्लास्टिक, थर्मोकोल, कपड़े और लकड़ी जैसे कचरे स्टॉर्मवॉटर ड्रेन के जरिए समंदर में पहुंच गए थे, जिसे ऊंची लहरों (हाई टाइड) ने वापस किनारों पर धकेल दिया।

समुद्र तटों की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि पूरे शहर की चौपाटियां कचरे की मोटी परत से पट गई हैं, जिससे तटीय इलाकों में भयंकर दुर्गंध और प्रदूषण फैल गया है।

जुहू चौपाटी से निकला सबसे ज्यादा 1,824 मीट्रिक टन कूड़ा

बीएमसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, समुद्र द्वारा वापस लौटाए गए कुल कचरे का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा अकेले जुहू चौपाटी से एकत्र किया गया है, जहां से बीएमसी की सफाई टीमों ने 1,824 मीट्रिक टन कूड़ा उठाया। गंदगी के मामले में वर्सोवा चौपाटी दूसरे स्थान पर रही, जहां 277.6 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ।

इसके अलावा दादर-माहिम चौपाटी से 152 मीट्रिक टन, चिम्बाई से 127.2 मीट्रिक टन, मढ़ मार्वे से 44.24 मीट्रिक टन, गोराई से 38.82 मीट्रिक टन और गिरगांव चौपाटी से 33.66 मीट्रिक टन कचरा हटाना पड़ा।

समुद्री पानी में बढ़ा खतरनाक बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD)

समुद्र तटों पर कचरा जमा होने के साथ-साथ मुंबई के तटीय पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है। बीएमसी की हालिया स्टडी के अनुसार, बांद्रा और वर्सोवा के पानी में BOD का स्तर लगभग 100 mg/L और जुहू में 50 mg/L दर्ज किया गया है, जबकि इसके सुरक्षित होने की निर्धारित सीमा महज 10 mg/L है।

BOD का यह अत्यधिक बढ़ा हुआ स्तर पानी में तेजी से बढ़ते ऑर्गेनिक प्रदूषण को दर्शाता है, जो समुद्री जीवों के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है।

मैंग्रोव और संरक्षित समुद्री प्रजातियों पर मंडराया संकट

पर्यावरण संस्था 'द ओशन क्लीनअप' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि मुंबई के लगभग 50 बड़े नालों के जरिए हर साल औसतन 5,000 मीट्रिक टन प्लास्टिक अरब सागर में समा जाता है। तैरता हुआ यह प्लास्टिक पानी में घुलता नहीं है और मानसून के दौरान वापस तटों पर आ जाता है।

इस भयंकर तटीय प्रदूषण के कारण न केवल चौपाटियों की सुंदरता नष्ट हो रही है, बल्कि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, मैंग्रोव के जंगलों और कई संरक्षित समुद्री प्रजातियों के जीवन पर भी भारी संकट मंडरा रहा है।

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