सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे अन्ना हजारे, सरकार को दी कड़ी नसीहत, कहा- आंदोलन को नजरअंदाज करना ठीक नहीं
Anna Hazare Support Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक के समर्थन में अन्ना हजारे उतर आए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को नजरअंदाज करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।
- Written By: गोरक्ष पोफली
साेनम वांगचुक और अन्ना हजारे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Anna Hazare Advises Government: जंतर मंतर पर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का आंदोलन अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। इस आंदोलन की गूंज अब महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि तक पहुंच चुकी है, जहां दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने वांगचुक के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है। अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील करते हुए एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है।
अन्ना हजारे ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सोनम वांगचुक का आंदोलन पिछले 20 दिनों से लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं है और सरकार को इस आंदोलन की गंभीरता को समझना चाहिए। अन्ना के अनुसार, इतने लंबे समय से चल रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को प्रशासन द्वारा हल्के में लेना लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है।
सरकार को अन्ना की दो टूक नसीहत
भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चलाने वाले अन्ना हजारे ने वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस आंदोलन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि सरकार को इस मामले में ऐसी नीति नहीं अपनानी चाहिए जिससे आंदोलन को और अधिक लंबा खींचा जाए। अन्ना का मानना है कि किसी भी आंदोलन को लटकाए रखना समाधान नहीं, बल्कि समस्याओं को और अधिक पेचीदा बनाना होता है।
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संवाद ही एकमात्र रास्ता
समाधान का रास्ता सुझाते हुए अन्ना हजारे ने सरकार से पुरजोर अपील की है कि वह इस मुद्दे को संवाद के जरिए सुलझाए। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की मेज पर बैठना चाहिए और जल्द से जल्द इस समस्या का कोई ठोस समाधान निकालना चाहिए। उनके मुताबिक, एक पारदर्शी बातचीत ही वह जरिया है जिससे लद्दाख के लोगों की चिंताओं को दूर किया जा सकता है।
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यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था को बचाने की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। अन्ना हजारे और सोनम वांगचुक, दोनों ही अपनी सादगी और अहिंसक आंदोलनों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में अन्ना हजारे का समर्थन मिलने से इस आंदोलन को नैतिक बल मिला है।
फिलहाल, अब सबकी नजरें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह अन्ना हजारे की इस अपील और सोनम वांगचुक की मांगों पर क्या रुख अपनाती है। क्या सरकार बातचीत का रास्ता खोलेगी या यह विवाद और लंबा खिंचेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
