दल-बदल करवा कर संविधान की धज्जियां उड़ा रही है बीजेपी और शिवसेना, सुप्रीम कोर्ट की देरी पर भड़की अंजलि दमानिया
Anjali Damania Slams Supreme Court: शिवसेना यूबीटी में टूट पर सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया का गुस्सा फूटा; शिवसेना, बीजेपी और सुप्रीम कोर्ट पर अंजलि दमानिया ने साधा निशाना।
- Written By: अनिल सिंह
शिवसेना UBT में टूट के बीच अंजलि दमानिया ने न्यायपालिका पर उठाए गंभीर सवाल (फोटो क्रेडिट-X)
Anjali Damania Slams SC On Shiv Sena UBT Defection: महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की संभावित बगावत को लेकर चल रहे घमासान में अब देश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं की एंट्री भी हो गई है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व ‘आप’ नेता अंजलि दमानिया ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। दमानिया ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना पर दल-बदल करवा कर देश के संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इसके साथ ही, उन्होंने इस तरह के गंभीर राजनीतिक मामलों पर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) द्वारा की जा रही देरी पर भी तीखी नाराजगी जाहिर की है।
अंजलि दमानिया ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल या विशेष रूप से ‘उबाथा’ (UBT) समूह की अंध समर्थक नहीं हैं, बल्कि वे पूरी तरह से भारतीय लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की पक्षधर हैं।
सुप्रीम कोर्ट के रवैये पर दमानिया का दुख
महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट पर न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अंजलि दमानिया ने इसे एक बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी करार दिया। उन्होंने बेहद दुखी मन से कहा, “मुझे यह देखकर गहरा दुख होता है कि हमारे देश का सर्वोच्च न्यायालय (SC) अन्य सभी सामान्य मामलों को अधिक महत्वपूर्ण मानकर प्राथमिकता दे रहा है, जबकि यहां खुलेआम संविधान को चुनौती दी जा रही है। भाजपा एक के बाद एक लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनमत को नष्ट कर रही है, और सुप्रीम कोर्ट इस दलबदल विरोधी मामले की सुनवाई को लगातार टाल रहा है।” दमानिया ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ‘न्याय में देरी, न्याय का विनाश है’ और यदि गिरती हुई न्यायपालिका को समय पर नहीं संभाला गया, तो भारत को लोकतंत्र कहना बेमानी होगा।
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दमानिया ने गिनाए उदाहरण
जनता के साथ हुए धोखे पर आक्रोश व्यक्त करते हुए दमानिया ने जमीनी चुनावी समीकरणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नांदेड़-वाशिम से संजय देशमुख ने शिंदे गुट के हेमंत पाटिल के खिलाफ चुनाव लड़ा था और जनता ने शिंदे गुट को नकार कर देशमुख को जिताया था। इसी तरह भाऊसाहेब वागचौरे ने सदाशिव लोखंडे के खिलाफ और नागेश पाटिल ने भाऊराव कदम के खिलाफ विपरीत विचारधारा पर चुनाव लड़ा था। दमानिया ने कहा, “इन सांसदों पर विश्वास करके जनता ने एक निश्चित चिन्ह और विचारधारा को वोट दिया था। लेकिन अब ये सब पाला बदलकर उसी शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं, जिसे जनता ने चुनाव में हराया था। यह मतदाताओं के वोट और उनके पवित्र विश्वास की खुली सौदेबाजी है।”
अमित शाह से मुलाकात पर उठाए तीखे सवाल
दमानिया ने इस पूरे ‘ऑपरेशन टाइगर‘ की टाइमिंग और इसके पीछे की वित्तीय कड़ियों पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने सवाल किया कि अचानक रात के सन्नाटे में सभी सांसद चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली कैसे पहुंच गए? इस वीआईपी यात्रा का करोड़ों रुपये का खर्च किसने उठाया, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसके अलावा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का अचानक रात में दिल्ली पहुंचना भी संदेहास्पद है। दमानिया ने अंत में एक बड़ा राजनीतिक तीर छोड़ते हुए कहा, “अगर इन सांसदों को शिंदे समूह के पास ही जाना है, तो वे दिल्ली जाकर सबसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से क्यों मिल रहे हैं? इस पूरे घटनाक्रम को देखकर गहरा संदेह पैदा होता है कि इसके पीछे महायुति के भीतर का अंदरूनी फडणवीस बनाम अमित शाह विवाद काम कर रहा है।”
