

Krishna Patil Ashtikar MLC Election: महाराष्ट्र विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 18 जून 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले, राज्य की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' ने एक नया और दिलचस्प पारिवारिक-राजनीतिक पेच फंसा दिया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 सांसदों की संभावित बगावत के बीच सबसे बड़ा धर्मसंकट हिंगोली-नांदेड़ क्षेत्र में खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां हिंगोली के यूबीटी सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर दिल्ली में एकनाथ शिंदे के पाले में जाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बेटे कृष्णा पाटिल आष्टीकर नांदेड़ स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से महाविकास अघाड़ी (MVA) के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।
इस अजीबोगरीब स्थिति ने उद्धव ठाकरे और महाविकास अघाड़ी के शीर्ष नेतृत्व को बेहद असहज कर दिया है, जिसके कारण मतदान से चंद घंटे पहले मातोश्री में आपातकालीन बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
नांदेड़ विधान परिषद सीट पर राजनीतिक समीकरण पहले से ही बेहद पेचीदा थे। महाविकास अघाड़ी ने शुरुआत में कांग्रेस के रामदास पाटिल सुमथंकर को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, नामांकन वापसी के आखिरी दिन नाटकीय घटनाक्रम के तहत सुमथंकर को अपना नाम वापस लेना पड़ा और कांग्रेस के वॉकओवर के बाद महाविकास अघाड़ी ने सर्वसम्मति से निर्दलीय उतरे कृष्णा पाटिल आष्टीकर को अपना आधिकारिक समर्थन दे दिया। उस समय तक सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी पूरी वफादारी का दावा किया था, लेकिन अब पिता के पाला बदलने की खबरों के बाद एमवीए के नेता ठगे से महसूस कर रहे हैं।
सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने रविवार को मुंबई में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई आपात बैठक से दूरी बना ली थी। हालांकि, उन्होंने नांदेड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सफाई दी थी कि वे नांदेड़ के स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों में व्यस्त होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके और वे आखिरी सांस तक उद्धव ठाकरे के साथ ही रहेंगे। लेकिन इस बयान के महज 24 घंटे के भीतर ही उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और वे अन्य 5 बागी सांसदों के साथ दिल्ली में पाए गए। पिता के इस यू-टर्न ने नांदेड़ में उनके बेटे कृष्णा के चुनावी गणित को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
मराठवाड़ा क्षेत्र की चार विधान परिषद सीटों पर होने वाला यह चुनाव महायुति और महाविकास अघाड़ी दोनों के लिए नाक की लड़ाई बन चुका है। इस दलबदल का सबसे बड़ा असर धाराशिव-बीड-लातूर (जहां से बागी सांसद ओमराजे निंबालकर आते हैं) और परभणी-हिंगोली-नांदेड़ की सीटों पर पड़ने की पूरी संभावना है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या उद्धव ठाकरे अब भी आष्टीकर के बेटे कृष्णा को अपना समर्थन जारी रखेंगे या फिर चुनाव से ऐन पहले महाविकास अघाड़ी के वोटर्स को किसी अन्य विकल्प या रणनीतिक कदम की ओर मोड़ने का व्हिप जारी करेंगे। यदि उद्धव ठाकरे आखिरी क्षणों में हाथ खींचते हैं, तो बीजेपी के उम्मीदवार अमरनाथ राजूरकर की राह बेहद आसान हो जाएगी।