Shiv Sena UBT On Latur Train Attack (फोटो क्रेडिट-X)
Sena UBT Latur on Latur Train Attack: लातूर के रहने वाले हाफिज मोहम्मद इमरान के साथ ट्रेन में हुई कथित मारपीट की घटना अब महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गई है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस मुद्दे पर महायुति और केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश में वेशभूषा और धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाना एक खतरनाक चलन बन गया है।
आनंद दुबे के इस तीखे बयान ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
आनंद दुबे ने एक प्रसिद्ध गीत की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘न तू हिंदू बनेगा, न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा, लेकिन आज समाज को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है। दुबे ने आरोप लगाया कि भाजपा और महायुति के शासनकाल में नफरत की आग बुझने के बजाय और भड़क रही है। उनके अनुसार, लातूर के एक व्यक्ति का केवल टोपी और दाढ़ी की वजह से ट्रेन में पीटा जाना यह दर्शाता है कि अब आम नागरिक के लिए सफर करना भी सुरक्षित नहीं रह गया है।
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आनंद दुबे ने केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को भी घेरा। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा और गिरिराज सिंह जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि ऐसे नेताओं की बयानबाजी समाज में जहर घोलने का काम कर रही है। दुबे ने सवाल उठाया:
असुरक्षा का माहौल: क्या अब महाराष्ट्र और देश के बाहर कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान के साथ सुरक्षित नहीं है?
नारे बनाम हकीकत: ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा केवल चुनावी जुमला बनकर रह गया है, जबकि जमीन पर लोग एक-दूसरे को धर्म के नाम पर पीट रहे हैं।
कानून का इकबाल: सरकार को अहंकार छोड़कर अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना चाहिए।
शिवसेना (UBT) ने मांग की है कि लातूर पिटाई मामले की जांच किसी के दबाव में आए बिना निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। दुबे ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली, तो समाज में असुरक्षा की भावना और बढ़ेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कानून-व्यवस्था पर ध्यान दें ताकि आम आदमी, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है, लेकिन विपक्षी दलों के हमलावर रुख से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।