BJP ने अबू आजमी को ‘वंदे मातरम्’ गायन में शामिल होने का दिया न्यौता, अमित साटम ने लिखा पत्र
Vande Mataram Event: भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम ने सपा विधायक अबू आसिम आजमी को “वंदे मातरम्” गायन कार्यक्रम में आमंत्रित किया। आजमी ने पहले इसे अनिवार्य बनाने का विरोध जताया था।
- Written By: आकाश मसने
अबू आजमी व अमित साटम (सोर्स: सोशल मीडिया)
Amit Satam Invites Abu Azmi: भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष अमित साटम ने समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक अबू आसिम आजमी को शुक्रवार की सुबह शहर में उनके आवास के निकट होने वाले राष्ट्रीय गीत ‘‘वंदे मातरम्” के गायन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।
साटम ने बृहस्पतिवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर निमंत्रण की एक प्रति साझा की, जिसमें उन्होंने आजमी को टैग किया। उन्होंने लिखा, ‘‘आप सादर आमंत्रित हैं। वंदे मातरम् राष्ट्रवाद, एकता और प्रेरणा का प्रतीक है। आप भी अन्य लोगों के साथ इस गीत को गा सकते हैं।”
आपण सादर निमंत्रित आहात @abuasimazmi pic.twitter.com/BHbV08M9Kt — Ameet Satam (@AmeetSatam) November 6, 2025
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सरकार ने वंदे मातरम् गायन का दिया आदेश
यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र सरकार ने सभी स्कूलों को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक इसका पूरा संस्करण गाने का निर्देश दिया है।
बंकिम चंद्र चटर्जी ने सात नवंबर, 1875 को अक्षय नवमी के मौके पर इस राष्ट्रीय गीत की रचना की थी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 27 अक्टूबर को जारी परिपत्र में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को गीत के इतिहास को दर्शाने वाली प्रदर्शनियां भी आयोजित करनी चाहिए।
आजमी ने जताया था विराेध
मुंबई के मानखुर्द-शिवाजीनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले और इसी क्षेत्र में रहने वाले आजमी ने पहले वंदे मातरम् गायन को अनिवार्य बनाने का विरोध करते हुए कहा था कि विभिन्न धर्मों के लोगों को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार के निर्देश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आजमी ने कहा था कि गायन को अनिवार्य बनाना उचित नहीं है, क्योंकि लोगों की धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग होती हैं।
उन्होंने कहा था कि इस्लाम अपनी मां का सम्मान करने को महत्व देता है, लेकिन उसके सामने सजदा करने की अनुमति नहीं देता। भाजपा का नाम लिए बिना आजमी ने यह भी कहा था कि कुछ पार्टियां विकास पर ध्यान देने के बजाय हिंदू-मुस्लिम राजनीति में लिप्त हैं।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
