

CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया।
आदित्य ठाकरे बोले- लोकतंत्र की बहाली तक मौजूदा शासन और देशभक्त युवाओं के बीच संघर्ष जारी रहेगा।
Aaditya Thackeray Statement On CJP Leaders Arrest: शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने कॉकराेच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा शासन और देशभक्त युवा भारतीयों के बीच संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक लोकतंत्र की बहाली नहीं हो जाती। CJP के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली के जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने की कोशिश के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आदित्य ठाकरे की यह प्रतिक्रिया आई।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज थामना युवा भारतीयों के लिए कब से अपराध हो गया है? उन्होंने कहा कि मौजूदा शासन और देशभक्त युवाओं के बीच लोकतंत्र को फिर से हासिल करने तक लड़ाई जारी रहेगी।
आदित्य ठाकरे से पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना अपराध नहीं है और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है। गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और वे इसे फिर से हासिल करेंगे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को शांति बनाए रखने के मुचलके की कथित अवहेलना करने और जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश करने के आरोप में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दोनों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है।
पुलिस ने बताया कि उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण के लिए पाबंद किया गया है। उन्हें निजी मुचलके और पांच हजार रुपये की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं को मंगलवार तड़के हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि उन्होंने अवरोधक तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, शांति बनाए रखने के बंधपत्र की अवहेलना और सरकारी कर्मचारी को आधिकारिक कर्तव्य निभाने से रोकने सहित विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से भी हटा दिया गया है।