

CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश।
पुलिस ने शांति बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और प्रतिबंधित प्रदर्शन क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप लगाए।
मामले में BNS की धाराओं और कानूनी प्रक्रिया का जिक्र।
Jantar Mantar Protest: इन दिनों देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदरेशन हो रहे हैं। जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शन करने के मामले में CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, दोनों नेताओं पर पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और जंतर-मंतर के प्रतिबंधित प्रदर्शन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोप हैं। हालांकि, न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने उनको दोषी ठहरा दिया है।
12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका समेत CJP के सदस्यों ने कथित तौर पर बैरिकेड पार कर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया। वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने और नारेबाजी करने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने पहले शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरा था। पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्होंने इसकी शर्तों का उल्लंघन किया और दोबारा कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। इसी आधार पर दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
पुलिस की ओर से दर्ज मामले में कथित अतिक्रमण, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, शांति बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने जैसे आरोपों का जिक्र है।
कानून क्या कहता है: ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी या लोक सेवक को उसका काम करने से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल करना।
सजा का प्रावधान: अधिकतम 5 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों।
कानून क्या कहता है: लोक सेवक को उसके कानूनी कर्तव्य का पालन करने से रोकने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट या दर्द पहुंचाना।
सजा का प्रावधान: अधिकतम 5 साल तक की जेल और जुर्माना।
कानून क्या कहता है: किसी प्रतिबंधित या निजी संपत्ति में अपराध करने के इरादे से अवैध रूप से प्रवेश करना।
सजा का प्रावधान: साधारण अपराध के इरादे से घुसपैठ करने पर 2 साल तक की जेल, जबकि गंभीर अपराध के मामले में 7 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान बताया गया है।
कानून क्या कहता है: पूर्व नियोजित योजना के तहत दो या अधिक लोगों का किसी अपराध को अंजाम देने के लिए साजिश रचना।
सजा का प्रावधान: सजा साजिश के उद्देश्य और संबंधित अपराध के आधार पर तय होती है। कुछ मामलों में मुख्य अपराध के लिए निर्धारित सजा लागू हो सकती है, जबकि अन्य मामलों में कम अवधि की सजा का प्रावधान है।
न्यायिक हिरासत के दौरान मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आगे की सुनवाई में अदालत पुलिस की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, आरोपों और अन्य तथ्यों पर विचार करेगी। यदि मामला आरोपपत्र दाखिल करने और ट्रायल तक पहुंचता है, तो अभियोजन पक्ष को आरोपों को कानूनी मानकों के अनुरूप साबित करना होगा।
वहीं, CJP नेताओं की गिरफ्तारी और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का मुद्दा राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था और पहले दी गई शर्तों के उल्लंघन के मद्देनजर की गई।