इजरायल-ईरान युद्ध के बीच आदित्य ठाकरे को याद आए मनमोहन सिंह, मोदी सरकार से अर्थव्यवस्था पर मांगा स्पष्टीकरण

Aaditya Thackeray on Iran Israel Conflict: आदित्य ठाकरे ने मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते भारत की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने सर्वदलीय बैठक बुलाने और डॉ. मनमोहन सिंह जैसी दूरदर्शिता की मांग की।
Aditya Thackeray on Iran Israel Conflict
Aditya Thackeray on Iran Israel Conflict (फोटो क्रेडिट-X)
Published on
Updated on

Aaditya Thackeray on Manmohan Singh: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को आर्थिक अस्थिरता के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। 1 मार्च को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि होने के बाद यह संघर्ष और अधिक हिंसक हो गया है। इस वैश्विक संकट के बीच, शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने मोदी सरकार को देश की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के प्रति आगाह किया है।

आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस युद्ध के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से निपटने के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श शुरू किया जाए।

आदित्य ठाकरे की मांग: सर्वदलीय बैठक और पारदर्शिता

आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत एक बड़ी आबादी वाला देश है और हमारी अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है। उन्होंने लिखा, "मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर ग्लोबल सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ना तय है। केंद्र सरकार को आगामी महीनों के लिए ठोस नीति निर्माण करना चाहिए और इस प्रक्रिया में सभी दलों को विश्वास में लेना चाहिए।" उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शिता की उम्मीद जताई है ताकि भविष्य के संकटों से बचा जा सके।

डॉ. मनमोहन सिंह का जिक्र और वैश्विक मंदी की याद

अपनी पोस्ट में आदित्य ठाकरे ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद किया। उन्होंने कहा कि आज के कठिन समय में मनमोहन सिंह जी की कमी महसूस होती है, जिन्होंने 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान भारत को बहुत ही कुशलता और सुरक्षा के साथ संकट से बाहर निकाला था। ठाकरे के अनुसार, वर्तमान स्थिति में भी वैसी ही दूरदर्शिता और आर्थिक विशेषज्ञता की आवश्यकता है, ताकि भारत की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच न आए।

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर संभावित असर

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने पर देश में महंगाई बढ़ने और रुपये की वैल्यू गिरने का खतरा है। खामेनेई की मौत के बाद तेहरान और यरूशलम के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं, जिससे खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और वहां से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com