

Maharashtra Assembly Monsoon Session 2026: 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों के दलबदल के बाद महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र उम्मीद के मुताबिक बेहद हंगामेदार हो गया है। सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को विधानसभा के भीतर युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच तीखा आमना-सामना हुआ। दोनों नेताओं के बीच हुई इस भयंकर बहस और व्यक्तिगत आक्षेपों ने सदन के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया। आदित्य ठाकरे द्वारा उठाए गए एक सवाल और उनके आक्रामक रुख के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट भी किया, जिसके बाद शिंदे ने पलटवार करते हुए ठाकरे गुट को आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दे डाली।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब आदित्य ठाकरे के एक सवाल के दौरान उनके संबंधित विभाग के प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सदन में मौजूद नहीं थे। ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को अक्षम बताया और कहा कि वो हमेशा जवाब देने के समय गायब रहते हैं।
एकनाथ शिंदे की अनुपस्थिति से नाराज आदित्य ठाकरे अपने विधायकों के साथ सदन से बाहर आ गए और मीडिया के सामने सरकार व विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर जमकर भड़ास निकाली। आदित्य ने आरोप लगाया, "मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री तो फिर भी सदन में बैठते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हमेशा जवाब देने से डरते हैं और सदन से भागने की कोशिश करते हैं। वे पूरी तरह अक्षम हैं और बाहर बैठकर सिर्फ पैसों का खेल खेल रहे हैं, गद्दारी करवा रहे हैं। जब हमने मंत्रियों की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई, तो अध्यक्ष राहुल नार्वेकर झूठ बोलकर बचाव करने लगे कि ऐसा 2019-20 में भी होता था। जो अध्यक्ष गंदी राजनीति और झूठ का साथ दे, उसे तुरंत पद से हटा देना चाहिए।"
आदित्य ठाकरे के वॉकआउट करने के कुछ ही देर बाद एकनाथ शिंदे सदन में पहुंचे और विपक्ष की अनुपस्थिति में ठाकरे गुट पर बेहद आक्रामक अंदाज में बरस पड़े। शिंदे ने गुस्से में कहा, "कल जो 6 सांसदों के जाने का जोरदार झटका इन्हें लगा है, उससे इनका मानसिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। इन्हें आगे अभी और भी बड़े झटके लगने वाले हैं। जब किसी विभागीय कार्य की पूरी जानकारी राज्य मंत्री के पास नहीं होती, तो मैं खुद या मुख्यमंत्री सदन में आकर जवाब देते हैं। लेकिन इनके पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, ये पूरी तरह निराश और हताश हैं। सदन में आकर बेवकूफी भरी हरकतें करना और समय बर्बाद करना ही इनका काम रह गया है।"
सदन के भीतर अध्यक्ष के अधिकारों और मर्यादा का बचाव करते हुए एकनाथ शिंदे ने वरिष्ठ विपक्षी नेता जयंत पाटिल को भी आड़े हाथों लिया। शिंदे ने कहा, "अध्यक्ष का निर्णय गलत बताने का अधिकार किसी को नहीं है। जयंत पाटिल जी, जरा पीछे मुड़कर देखिए और आत्मनिरीक्षण कीजिए कि 2019 से 2022 के बीच (महा विकास आघाड़ी सरकार के दौरान) सदन कैसे चलता था? क्या तब के मुख्यमंत्री कभी सदन में आकर बैठते भी थे? उनसे जवाब मांगने की हिम्मत किसी में थी? इसलिए मेरी विनती है कि आप लोग आदित्य ठाकरे को थोड़ा समझाएं और उन्हें राजनीति की गंभीरता सिखाएं।" शिंदे के इस कड़े रुख और 'अभी और झटके लगेंगे' वाले बयान ने साफ कर दिया है कि 'ऑपरेशन टाइगर' के बाद महायुति के हौसले बुलंद हैं और वे विपक्ष को कोई रियायत देने के मूड में नहीं हैं।