Maharashtra SSC Result 2026: अपनी ही मातृभाषा में पिछड़े छात्र, 94 हजार से ज्यादा विद्यार्थी मराठी में फेल

Maharashtra Class 10th Result 2026: महाराष्ट्र बोर्ड 10वीं के नतीजों में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य की राजभाषा मराठी में 94,544 छात्र फेल हो गए हैं। जबकि अन्य भाषाओं का परिणाम शानदार रहा।
Maharashtra SSC Results 2026 Over 94000 Students Fail in Marathi
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
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Maharashtra Class 10th Marathi Subject Result: महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आज कक्षा 10वीं के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। जहां एक ओर राज्य का कुल प्रदर्शन सुधार की ओर है और 35 में से 12 विषयों का परिणाम 100% रहा है, वहीं दूसरी ओर एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिस राज्य की पहचान उसकी मराठी संस्कृति और भाषा से है, उसी राज्य के करीब 94,544 छात्र मराठी विषय में अनुत्तीर्ण हो गए हैं।

प्रथम भाषा के रूप में मराठी का प्रदर्शन

महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड द्वारा जारी 10वीं बोर्ड परीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल 10,87,699 छात्रों ने प्रथम भाषा के रूप में मराठी को चुना था। इनमें से 80,803 छात्र फेल हो गए हैं। प्रथम भाषा के रूप में मराठी का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 92.57% रहा है।

द्वितीय और तृतीय भाषा में भी मराठी का बुरा हाल

केवल प्रथम भाषा ही नहीं, बल्कि द्वितीय और तृतीय भाषा के रूप में मराठी चुनने वाले छात्रों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। इस श्रेणी में परीक्षा देने वाले 4,13,917 छात्रों में से 13,741 छात्र फेल हुए हैं। मतलब महराष्ट्र में कुल मिलाकर 94 हजार से अधिक छात्रों का मराठी विषय में फेल हो गए।

अन्य भाषाओं ने मारी बाजी

दिलचस्प बात यह है कि जहां मराठी में गिरावट देखी गई, वहीं अन्य भाषाओं का परिणाम काफी बेहतर रहा।

  • गुजराती: द्वितीय और तृतीय भाषा के रूप में गुजराती चुनने वाले सभी 302 छात्र (100%) उत्तीर्ण हुए।
  • संस्कृत: 96,331 छात्रों में से 95,571 छात्र उत्तीर्ण हुए, जिसका परिणाम 99.21% रहा।
  • अरबी: इस विषय का परिणाम 99.59% रहा।

विशेषज्ञों की राय ने क्या कहा?

मराठी भाषा के व्यापक हितों के लिए काम करने वाले आंदोलन के संयोजक श्रीपाद भालचंद्र जोशी ने इस पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिए जाने के बावजूद राज्य में इसकी अनदेखी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मराठी भाषा नीति के तहत कक्षा 12वीं तक मराठी अनिवार्य करने का वादा किया था, लेकिन अभी तक कानून में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि स्कूलों में मराठी पढ़ाने के तरीकों और छात्रों के बीच भाषा के प्रति बढ़ती अनास्था पर गंभीरता से विचार किया जाए।

बता दें कि मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों में कई आंदोलन किए। हिंदी बनाम मराठी को लेकर विवाद भी होते रहता है। हिंदी को अनिवार्य करने वाले महायुति के निर्णय के खिलाफ राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे की पार्टी ने सड़कों पर उतर कर आंदोलन किया था और मराठी को दबाने का आरोप लगाया था। ऐसी स्थिति में मराठी विषय में इतने छात्राें का फेल होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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