

Marathi Mandatory for Drivers: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में टैक्सी, रिक्शा, ओला और उबर जैसे व्यावसायिक वाहनों के चालकों के लिए यात्रियों से मराठी में संवाद करना अनिवार्य करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। यद्यपि यह निर्णय मूल रूप से 2019 में लिया गया था, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के अभाव में यात्रियों, विशेषकर स्थानीय नागरिकों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों, लेखकों और प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेष बैठक बुलाई है।
परिवहन विभाग का लक्ष्य 'महाराष्ट्र दिवस' (1 मई) के अवसर पर इस निर्णय को पूरी सख्ती के साथ जमीन पर उतारना है। हाल ही में मराठी भाषा को 'शास्त्रीय भाषा' (Classical Language) का दर्जा मिलने के बाद इस पहल का सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ गया है। सरकार की मंशा केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि प्रवासी चालकों के बीच मराठी भाषा के प्रति सम्मान और लगाव पैदा करना भी है।
अमराठी चालकों को भाषा सिखाने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रबुद्ध लेखकों और भाषा विशेषज्ञों का सहयोग लिया है। इस अभियान में मुंबई मराठी साहित्य संघ की अध्यक्ष उज्ज्वला मेहेंदले, वरिष्ठ लेखक प्रदीप धवन, महेश केलुस्कर, संतोष राणे और अशोक बागवे सहित कई दिग्गज साहित्यकार मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। यह विशेषज्ञ सुनिश्चित करेंगे कि पाठ्यक्रम सरल और व्यवहारिक हो, ताकि चालक यात्रियों के साथ आसानी से संवाद कर सकें।
इस नीति की रूपरेखा तैयार करने के लिए कल, 24 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में परिवहन आयुक्त और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा मराठी भाषा के अनिवार्य उपयोग का रोडमैप तैयार करना, इसके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई और चालकों के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना पर चर्चा करना है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का मानना है कि यात्रियों और चालकों के बीच भाषा की बाधा अक्सर विवादों का कारण बनती है। मराठी को अनिवार्य करने से न केवल संवाद सुगम होगा, बल्कि महाराष्ट्र की अस्मिता का भी सम्मान होगा। सरकार उन चालकों को रियायत देने के पक्ष में नहीं है जो लंबे समय से राज्य में काम कर रहे हैं लेकिन स्थानीय भाषा बोलने से कतराते हैं।