PM मोदी की WFH अपील पर प्रियंका चतुर्वेदी का पलटवार; असम के मुख्यमंत्री के समारोह पर कसा तीखा तंज

Priyanka Chaturvedi vs PM Modi WFH: प्रियंका चतुर्वेदी ने असम में हिमंत बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण पर तंज कसा। देशवासियों से मोदी की अपील के बाद उन्होंने कहा- उम्मीद है पीएम इसे 'वॉच फ्रॉम होम' बनाएंगे।
Priyanka Chaturvedi vs PM Modi WFH
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Priyanka Chaturvedi Tweet On WFH Appeal From Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खाड़ी युद्ध और वैश्विक संकट के मद्देनजर देशवासियों से सावधानी बरतने की अपील पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिसमे उन्होंने लोगों से वर्क फ्रॉम होम करने की सोने की अधिक खरीद ना करने की अधिक विदेश यात्रा टालने की और निजी के बदले सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करने की सलाह दी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी इस मुद्दे पर सबसे मुखर नजर आ रही हैं।

उन्होंने 12 मई को होने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह (संभावित प्रशासनिक फेरबदल/कार्यक्रम) को आधार बनाकर प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर बताया है। प्रियंका ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि वे उम्मीद करती हैं कि 12 मई का यह वीआईपी कार्यक्रम 'वॉच फ्रॉम होम' के सिद्धांत पर आधारित होगा। उनका सीधा संकेत इस ओर था कि यदि सरकार आम लोगों को घर से काम करने और ईंधन बचाने की सलाह दे रही है, तो बड़े राजनीतिक जमावड़े और रैलियों पर रोक लगाकर सत्ता पक्ष को मिसाल पेश करनी चाहिए।

पीएम के 'WFH' मंत्र पर सियासी घमासान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया संबोधन में कहा था कि देश को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए हमें पेट्रोल, डीजल और सोने की खपत कम करनी होगी। विपक्ष ने इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए इसे चुनावी स्टंट और आम जनता पर बोझ डालने की कोशिश करार दिया था। प्रियंका चतुर्वेदी ने इससे पहले भी सवाल उठाया था कि चुनाव प्रचार के दौरान करोड़ों रुपये के विज्ञापन और हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल पर यह नियम क्यों लागू नहीं हुए?

असम के कार्यक्रम पर टिकी नजरें

असम में होने वाले इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को लेकर प्रियंका का "वॉक द टॉक" वाला कमेंट काफी चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष अब सरकार को उसी के 'नैतिकता के पाठ' पर घेरने की रणनीति अपना रहा है। यदि असम में बड़े पैमाने पर भीड़ जुटती है और वीआईपी काफिले निकलते हैं, तो विपक्ष इसे प्रधानमंत्री की अपील के अपमान के रूप में पेश करेगा।

आम जनता बनाम वीआईपी कल्चर

प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी संकेत दिया कि सरकार की अपील केवल मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए होती है, जबकि राजनेताओं के लिए प्रोटोकॉल के नाम पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने तंज कसा कि अगर देश संकट में है, तो क्या मंत्रियों के विदेश दौरों और भव्य आयोजनों पर सबसे पहले 'WFH' लागू नहीं होना चाहिए? 12 मई की तारीख अब इस राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।

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