Mumbai News: मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक का 92 फीसदी काम पूरा, जानें यात्रियों को कब तक करना होगा इंतजार
मुंबई-पुणे यात्रा को अधिक रफ्तार देने के लिए 6,695 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे बहुप्रतिक्षित मिसिंग लिंक परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। कई महत्वपूर्ण हिस्सों का काम प्रगति पर है।
- Written By: आंचल लोखंडे
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का 92% काम पूरा। (सौजन्य सोशल मीडिया)
मुंबई: मुंबई-पुणे यात्रा को अधिक रफ्तार देने के लिए 6,695 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे बहुप्रतिक्षित मिसिंग लिंक परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। कई महत्वपूर्ण हिस्सों का काम प्रगति पर है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की समय सीमा अब अगस्त 2025 तक बढ़ा दी गई है, इसलिए मुंबईकरों और पुणेकरों को सुगम यात्रा के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
मिली जानकारी के अनुसार, विशाल खंभों का निर्माण अब पूरा होने वाला है, इसके पूरा होने के बाद डेक निर्माण का कार्य पूरे जोर-शोर से शुरू कर दिया जाएगा। इस केबल-स्टेड वायाडक्ट को छोड़कर, इस परियोजना के अन्य सभी खंड, जिनमें एक और वायाडक्ट और 2 सुरंगें शामिल हैं, पहले ही पूरे हो चुके हैं।
6 किमी कम होगी दूरी
हालांकि, प्रोजेक्ट पूरा होने पर लोग घाट सेक्शन को पूरी तरह से बायपास करके कुसगांव और खोपोली निकास के बीच की कुल दूरी को आराम से पूरा कर पाएंगे, क्योंकि यह दूरी 6 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।
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5वीं बार बढ़ाई गई समय सीमा
महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एमएसआरडीसी) के अधिकारी ने प्रोजेक्ट की समयसीमा में बढ़ने की वजह कार्य में जटिलताओं को बताया। क्योंकि घाटी में लगातार चल रही हवाओं और अनिश्चित दृश्यता की स्थिति के बीच काम करना कठिन हो जाता है।
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इस प्रकार का है काम
- लागत- 6,695 करोड़
- काम की प्रगति – करीब 92%
- चरण – 2
- टनल – 2
- ब्रिज – 1
- समय की बचत – करीब 30 मिनट
- प्रोजेक्ट का अप्रूवल – 2017
- काम की शुरुआत – 2019
- काम पूरा – जून 2025
- कुल लंबाई – 13.3 किलोमीटर
परियोजना के लाभ
यह काम पूरा होने के बाद, यह मिसिंग लिंक अडोशी सुरंग और खंडाला निकास के बीच घाट खंड को बायपास करके यातायात की भीड़ को काफी हद तक कम कर देगा। यह मार्ग को 6 किमी से अधिक छोटा कर देगा, जिससे मोटर चालकों को यात्रा के समय में लगभग 25 मिनट की बचत होगी। नए लिंक से एक्सप्रेसवे के वर्तमान यातायात का 85% संभालने की उम्मीद है, जिससे मौजूदा मार्ग पर दबाव कम हो जाएगा।
