बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी MMRDA को नहीं मिले 3,000 फ्लैट, नीलकमल रियल्टर्स को फिर नोटिस

MMRDA Notice Nilkamal Realtors News: मीरा-भाईंदर की डीबी ओजोन टाउनशिप परियोजना में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद करीब 3,000 फ्लैट एमएमआरडीए को नहीं सौंपे गए हैं।
MMRDA Notice Nilkamal Realtors
बॉम्बे हाईकोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
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MMRDA Notice Nilkamal Realtors DB Ozone: बॉम्बे हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के करीब एक साल बाद भी मुंबई नीलकमल रियल्टर्स ने मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) को लगभग 3,000 फ्लैट नहीं सौंपे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एमएमआरडीए ने डेवलपर को दोबारा नोटिस जारी कर अदालत के आदेश का तत्काल पालन करने को कहा है। यह पूरा मामला दहिसर चेक नाका के पास मीरा-भाईंदर मनपा क्षेत्र में विकसित की गई विशाल टाउनशिप परियोजना से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, यह परियोजना वर्ष 2009 में तत्कालीन रेंटल हाउसिंग स्कीम (आरएचएस) के तहत मंजूर हुई थी।

योजना का उद्देश्य शहर में किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराना था। इसके तहत डेवलपर को 4 एफएसआई की विशेष अनुमति दी गई थी, जिसमें 25 प्रतिशत हिस्से पर बने फ्लैट एमएमआरडीए को सौंपना अनिवार्य था, जबकि शेष 75 प्रतिशत हिस्से पर डेवलपर को बिक्री योग्य प्रोजेक्ट विकसित करने की छूट मिली थी।

रियल्टर्स ने 8 इमारतों को छोड़ दिया अधूरा

इसी हिस्से को बाद में डी बी ओजोन टाउनशिप के रूप में विकसित किया गया, जिसमें कुल 26 इमारतें शामिल हैं। वर्तमान में यहां फ्लैटों की कीमत करीब 15 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट बताई जा रही है। दिसंबर 2010 में एमएमआरडीए को सौंपे जाने वाले 08 भवनों का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन वर्ष 2014 में राज्य सरकार ने रेंटल हाउसिंग स्कीम बंद कर दी।

हालांकि, पहले से स्वीकृत परियोजनाओं को शर्तों के साथ जारी रखने की अनुमति दी गई थी। नियमों के अनुसार बिक्री योग्य और पुनर्वास हिस्से का निर्माण समानांतर रूप से होना जरूरी था, लेकिन आरोप है कि नीलकमल रियल्टर्स ने बिक्री वाले फ्लैटों का निर्माण और बिक्री जारी रखी, जबकि एमएमआरडीए के हिस्से की 08 इमारतों को अधूरा छोड़ दिया।

बाद में डेवलपर ने यूडीसीपीआर-2020 के सेविंग क्लॉज' का हवाला देकर परियोजना को नई नीति में परिवर्तित करने की कोशिश की। एमएमआरडीए ने इसके लिए एनओसी भी जारी कर दी थी, लेकिन मीरा-भाईंदर महानगरपालिका ने आवेदन खारिज कर दिया।

प्राधिकरण को प्राप्त हुए करीब 6,700 फ्लैट

इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा। 7 अप्रैल 2025 को सुनाए गए फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रेंटल हाउसिंग स्कीम का लाभ लेने के बाद डेवलपर नई नीति के तहत राहत नहीं मांग सकता। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए इमारतों का निर्माण पूरा कर एमएमआरडीए को सौंपने का आदेश दिया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डेवलपर ने अब हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां एमएमआरडीए भी पक्षकार है।

शीर्ष अदालत में जवाब दाखिल

प्राधिकरण ने शीर्ष अदालत में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। एमएमआरडीए अधिकारियों के अनुसार, मीरा-भाईंदर क्षेत्र में रेंटल हाउसिंग स्कीम के तहत कुल 13 परियोजनाएं लागू हुई थी। जिनसे प्राधिकरण को करीब 6,700 फ्लैट प्राप्त हुए।

वहीं, मीरा-भाईंदर मनपा के शहर अभियंता दीपक खंबित ने बताया कि नीलकमल रियल्टर्स को छोड़कर बाकी सभी डेवलपर्स ने अपने दायित्व पूरे कर दिए हैं। प्रस्तावित 3,000 फ्लैटों में से लगभग 1,500 फ्लैट मनपा को मिलने थे।

मुंबई से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट

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