Mira Bhayandar Flyover Design Controversy: ठाणे जिले के मीरा-भाईंदर में मेट्रो लाइन 9 के समानांतर बनाए गए फ्लाईओवर पुल के विवादित डिजाइन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चार लेन का पुल अचानक दो लेन में सिमटने की योजना पर नागरिकों ने सवाल उठाए थे। इस बीच आरटीआई के जरिए जानकारी मांगने पर भी जिम्मेदार सलाहकारों, इंजीनियरों और ठेकेदारों पर किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आने से मामले ने तूल पकड़ लिया है।
मेट्रो लाइन के समानांतर बने फ्लाईओवर पुल के डिजाइन को लेकर व्यापक चर्चा और विवाद जारी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह का डिजाइन यातायात प्रबंधन के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकता है और इससे दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद एमएमआरडीए प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि फ्लाईओवर का डिजाइन भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और तकनीकी दृष्टि से यह उपयुक्त है। इस संबंध में प्राधिकरण ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आधिकारिक स्थिति भी स्पष्ट की, लेकिन नागरिक इससे संतुष्ट नहीं हुए।
बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने एक यातायात सलाहकार नियुक्त किया और पुल के डिजाइन में कुछ संशोधन भी किए। पुल से अंतिम छोर की ओर जाने वाले रास्ते पर बनाए गए नए डिवाइडर को हटा दिया गया है, जिससे उस स्थान पर अधिक जगह उपलब्ध हो सके और वाहनों की आवाजाही आसान हो सके।
इस पूरे मामले में पारदर्शिता लाने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट गॉडफ्रे पिमेंटा ने एमएमआरडीए से इस प्रोजेक्ट की फाइलों और दोषी अधिकारियों पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा। जन सूचना अधिकारी और कार्यकारी अभियंता नीलेश महाले द्वारा दिए गए जवाब ने सबको चौंका दिया। विभाग ने स्पष्ट किया कि विवादित डिजाइन के लिए जिम्मेदार सलाहकारों, इंजीनियरों या ठेकेदारों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की जानकारी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
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प्रशासनिक रवैये पर सवाल तब और गहरा गए जब आरटीआई के तहत 5500 पन्नों की जानकारी देने के बदले प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता से 11,000 रुपये फोटोकॉपी शुल्क और 1,260 रुपये डाक शुल्क, यानी कुल 12,260 रुपये की मांग की। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इतनी भारी-भरकम राशि मांगना और दोषियों पर कार्रवाई की जानकारी न देना, सीधे तौर पर जिम्मेदार पक्षों को बचाने की कोशिश है।