देवेंद्र फडणवीस की भाषा बोल रहे हैं संभाजी भिड़े, मनोज जरांगे ने साधा निशाना
मनोज जरांगे ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भिड़े को उनके खिलाफ नए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भिड़े फडणवीस की भाषा बोल रहे हैं और उन्हें मेरे खिलाफ नए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
- Written By: किर्तेश ढोबले
मनोज जरांगे ने संभाजी भिड़े पर साधा निशाना (सौ. सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए जारी घमासान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मनोज जरांगे ओबीसी कोटा से आरक्षण का मांग कर रहे है। वहीं उन्होंने कहा कि अगर सरकार हमें आरक्षण नहीं देगी, तो हम चुनाव में उतरेंगे। इसके लिए वह 28 अगस्त को इसकी आधिकारिक घोषणा करने वाले है। इस बीच कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मराठाओं के लिए आरक्षण की जरूरत पर कथित तौर पर सवाल उठाने के लिए दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिड़े पर निशाना साधा है।
जरांगे ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भिड़े को उनके खिलाफ नए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, “भिड़े फडणवीस की भाषा बोल रहे हैं और उन्हें मेरे खिलाफ नए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मराठा समुदाय फडणवीस और भाजपा से बहुत दूर जा रहा है।”
छगन भुजबल की आलोचना की
उन्होंने महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल की भी आलोचना की, जिन्होंने नासिक में उनकी रैली में शामिल हुए मराठों की संख्या के बारे में बयान दिया था। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के नेता भुजबल ने रविवार को दावा किया कि 13 अगस्त को नासिक में जरांगे की रैली में केवल 8,000 मराठा शामिल हुए थे। कार्यकर्ता ने पिछले कुछ हफ्तों में सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर, सतारा, पुणे, अहमदनगर और नासिक में रैलियां कीं।
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भुजबल बना दिजिए आरटीओ का अधिकारी
उन्होंने कहा, “भुजबल राज्य सरकार के सदस्य हैं और फडणवीस गृह मंत्री हैं। पुलिस उनकी है। हम जानते हैं कि रैली में कितने मराठा थे। अगर भुजबल सड़कों पर उतरने वाले मराठों की गिनती कर रहे हैं, तो उन्हें क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) का अधिकारी बना दिया जाना चाहिए और वाहनों में मराठों की गिनती करने के लिए एक सीटी थमा दी जानी चाहिए।”
मसौदा अधिसूचना को लागू करने की मांग
जरांगे उस मसौदा अधिसूचना को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें कुनबियों को मराठा समुदाय के सदस्यों के ‘सगे सोयारे’ (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता देते हुए ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान है। कुनबियों को ओबीसी के रूप में आरक्षण का लाभ मिलता है। हालांकि, ओबीसी सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया है कि उनका आरक्षण कम नहीं किया जाना चाहिए।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
