महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों का कड़वा सच! कहीं सांप का डर, कहीं दूषित खाना तो कहीं शिक्षक गायब

Maharashtra Tribal Ashram Schools: महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों की बदहाली का सच, पालघर और मेलघाट में दूषित खाने से बच्चों की बिगड़ती तबियत और शिक्षकों की कमी से ठप होती पढ़ाई की पूरी रिपोर्ट।
maharashtra tribal ashram schools situation
आश्रम शाला की सांकेतिक फोटो(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • पालघर के स्कूल में बुखार से छात्र की मौत पर SIT गठित

  • मेलघाट में दूषित भोजन खाने से सौ से अधिक आदिवासी छात्र बीमार

  • जर्जर हॉस्टल में सांप के काटने से तीन छात्राओं की हुई मौत

  • महाराष्ट्र की आदिवासी आश्रम स्कूलों का पूरा सच और घटनाओं की विशेष रिपोर्ट

Maharashtra Tribal Education Crisis: महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल इलाकों में संचालित सरकारी और अनुदानित आश्रम स्कूल सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के मोर्चे पर गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका स्थित जपतलाई में अनुदानित आश्रमशाला के हॉस्टल में आधी रात विषैले सांप के दंश से तीन छात्राओं की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गईं।

इस गंभीर घटना के बाद राज्य सरकार ने इस आश्रमशाला की शासकीय मान्यता कायमस्वरूपी रद्द कर दी तथा लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारी पर निलंबन के निर्देश दिए।

जानलेवा साबित हो रहे आदिवासी आश्रम स्कूल

पालघर जिले के मसवन स्थित आश्रम स्कूल में सात वर्षीय छात्र श्रेयंस अबंत की बुखार से मौत हो गई और 30 अन्य बच्चों में बुखार व खांसी के लक्षण पाए गए। इस मामले में स्कूल अधीक्षक को निलंबित कर SIT का गठन किया गया और FDA ने भोजन सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे। इसके अतिरिक्त, मेलघाट के धरणी तहसील में सेंट्रल किचन से भोजन आपूर्ति के बाद 100 से अधिक आदिवासी छात्र फूड पॉइजनिंग का शिकार होकर अस्पताल पहुंचे, जिसके बाद आपूर्तिकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

हॉस्टल में सफाई और सुरक्षा की खस्ताहाल स्थिति

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई आदिवासी आश्रम स्कूलों में बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का भारी अभाव है। छात्र-छात्राएं पास की नदियों और नालों में नहाने तथा शौच जाने के लिए मजबूर हैं, जहां ढलान पर फिसलने से गंभीर चोटें आने और डूबने जैसी जानलेवा दुर्घटनाएं होती हैं।

बारिश के दौरान छात्रावास के कमरों में पानी रिसता है और छात्राओं को सेनेटरी पैड तक मुहैया नहीं कराए जाते। जर्जर इमारतों के कारण कमरों में विषैले सांप, चूहे और जंगली जीव घुस आते हैं, जिससे बच्चे लगातार डर और अवसाद के साये में जीने को मजबूर हैं।

राज्य सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर रीव्यू मीटिंग में जब जर्जर इमारतों और अस्वच्छ परिसर की वास्तविक तस्वीरें सामने आईं, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और DPDC कोष से तत्काल मरम्मत और सुविधाएं प्रदान करने के आदेश दिए।

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शिक्षकों की भारी कमी से ठप होती पढ़ाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र राज्य में 497 सरकारी और 556 अनुदानित आश्रम स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 2.5 लाख आदिवासी विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन ये संस्थान लंबे समय से शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।

RTE के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए सैकड़ों स्कूल बिना पर्याप्त शिक्षकों के चल रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि नासिक जिले के कलवण और सुरगाणा तालुकों में शिक्षकों की पूर्ण अनुपस्थिति से नाराज अभिभावकों ने स्कूलों में ताले जड़ दिए और अपने बच्चों को घर वापस बुला लिया।

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डिजिटल पढ़ाई का सच और कनेक्टिविटी का संकट

पालघर जिले जैसे पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के आश्रम स्कूलों में छात्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्मार्ट बोर्ड और कंप्यूटर लगाए गए थे। हालांकि, इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने के कारण 30 कंप्यूटरों वाली प्रयोगशालाएं और स्मार्ट बोर्ड धूल फांक रहे हैं और पढ़ाई का एकमात्र जरिया केवल पाठ्यपुस्तकें बनी हुई हैं। अधिकांश पुस्तकें मराठी या अंग्रेजी में हैं, जबकि छात्रों की मातृभाषा वारली या कोंकणी है; विजुअल माध्यम के अभाव में बच्चे नई भाषाओं और विषयों में रुचि खो देते हैं।

सरकारी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने के लिए शिक्षकों को कक्षाएं छोड़कर 4-5 किलोमीटर दूर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। इसके अलावा, फोन नेटवर्क न होने के कारण हॉस्टल में रहने वाले बच्चे महीनों अपने परिजनों से बात नहीं कर पाते। इस संवादहीनता के कारण छुट्टियों में घर जाने के बाद कई बच्चे वापस स्कूल नहीं लौटते, जिससे ड्रॉपआउट रेट में भारी वृद्धि हो रही है।