छात्राओं को छात्रवृत्ति नहीं मिली, प्राध्यापकों के वेतन अटके, महाराष्ट्र के कॉलेजों पर भी संकट

Maharashtra News: छात्राओं को मुफ्त शिक्षा के बदले संस्थाओं को ट्यूशन फीस की रकम सरकार द्वारा दी जानी थी लेकिन वर्ष बीतने की कगार पर आने के बावजूद छात्राओं के हिस्से की निधि जारी नहीं की गई।
Maharashtra Students did not get scholarship professors salaries are stuck
छात्राएं (सोर्स: AI)
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Maharashtra Scholarship News: नागपुर बिना अनुदानित कॉलेजों की आर्थिक व्यवस्था छात्रों से मिलने वाली फीस पर निर्भर रहती है। फीस के अलावा आरक्षित वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति (ट्यूशन फीस) से ही प्राध्यापकों सहित कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य खर्च चलाया जाता है। सरकार ने पिछले वर्ष से उच्च शिक्षा हासिल करने वाली छात्राओं की पढ़ाई मुफ्त कर दी है। साथ ही छात्राओं से ट्यशून फीस नहीं वसूलने के भी आदेश हैं।

छात्राओं को मुफ्त शिक्षा के बदले संस्थाओं को ट्यूशन फीस की रकम सरकार द्वारा दी जानी थी लेकिन वर्ष बीतने की कगार पर आने के बावजूद सरकार द्वारा छात्राओं के हिस्से की निधि जारी नहीं की गई। छात्रवृत्ति की रकम नहीं मिलने से कई कॉलेजों में प्राध्यापकों के वेतन रोक दिये गये हैं। कहीं 2 महीने तो कई जगह 5 महीने से वेतन नहीं मिला है।

हालांकि ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग की छात्राओं को पहले से ही छात्रवृत्ति मिलती है लेकिन नये आदेश के बाद ओबीसी सहित ईबीसी, वीजे, एनटी, ईडब्ल्यूएस वर्ग की छात्राओं के लिए 100 फीसदी शुल्क माफ कर दिया गया।

इंजीनियरिंग कॉलेजों ने महाराष्ट्र सरकार के आदेश का पालन किया। उम्मीद थी कि सरकार द्वारा जल्द ही छात्रवृत्ति की निधि जारी की जाएगी लेकिन अब तक प्रतीक्षा ही की जा रही है।

वैद्यकीय शिक्षा व संशोधन विभाग में अटकी फाइल

नागपुर सहित विदर्भ में एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, नर्सिंग, फिजियोथेपी आदि पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाली छात्राओं की संख्या अधिक है। महाराष्ट्र हेल्थ यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित इन कॉलेजों ने शुरुआत में छात्राओं को फीस भरने को कहा। साथ ही यह भी बताया गया कि 2-3 महीने के बाद उन्हें फीस की रकम वापस मिल जाएगी।

उक्त पाठ्यक्रम में प्रवेश लिए वर्ष बीत रहा है लेकिन अब तक छात्राओं को उनकी फीस वापस नहीं मिली। इतना ही नहीं, आरक्षित वर्ग की छात्राओं की भी छात्रवृत्ति की रकम कॉलेजों को नहीं मिली है। यही वजह है कि प्राध्यापकों को वेतन देना मुश्किल हो रहा है।

कर्ज लेकर कॉलेज चलाने की नौबत

छात्रवृत्ति की रकम कॉलेजों के लिए बड़ा आधार होती है लेकिन समय पर निधि नहीं मिलने से संस्थाओं की हालत पतली हो गई है। कई संस्थाएं बाजार से कर्ज लेकर प्राध्यापकों सहित कर्मचारियों का वेतन कर रही हैं लेकिन यह सिलसिला अधिक दिनों तक नहीं चल सकता।

नये सत्र की प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। साथ ही हेल्थ यूनिवर्सिटी द्वारा नवंबर से वार्षिक परीक्षाएं ली जाएंगी। परिणाम घोषित होने के बाद छात्राओं को अगली कक्षा में प्रवेश लेना पड़ेगा। यानी इस बार भी फीस भरने की नौबत आएगी। इस हालत में सरकार की योजना निरर्थक साबित हो रही है।

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