महाराष्ट्र में हाउसिंग सोसायटी री-डेवलपमेंट के नियम बदले, 51% मंजूरी और 3 डेवलपर बिड जरूरी

Maharashtra Housing Society Redevelopment Rules: महाराष्ट्र सरकार ने को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के रीडेवलपमेंट नियमों को सख्त व पारदर्शी बना दिया है। 51% सहमति, VC से वोटिंग से जुड़े नए नियम लागू।
Maharashtra Co-operative Housing Society Redevelopment
को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के रीडेवलपमेंटप्रतीकात्मक तस्वीर
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Maharashtra Co-operative Housing Society Redevelopment Rules: महाराष्ट्र में अगर आपकी हाउसिंग सोसाइटी पुरानी हो चुकी है और आप उसके पुनर्विकास की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

महाराष्ट्र सरकार के कोऑपरेशन डिपार्टमेंट ने 30 सितंबर, 2026 को एक नया सरकारी आदेश (GR) जारी कर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के रीडेवलपमेंट नियमों को और अधिक पारदर्शी, सख्त और आधुनिक बना दिया है। यह नया आदेश 2019 के पुराने सर्कुलर और गाइडलाइन्स की जगह लेगा।

नए नियमों का मुख्य उद्देश्य बिल्डरों की मनमानी रोकना, सदस्यों के हितों की रक्षा करना और प्रोजेक्ट को बिना किसी कानूनी अड़चन के समय पर पूरा करना है। आइए जानते हैं इस नई पॉलिसी की 5 मुख्य बातें और नए नियम।

51% बहुमत और दो-तिहाई कोरम अनिवार्य

अब को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के रीडेवलपमेंट का शुरुआती फैसला लेने के लिए स्पेशल जनरल मीटिंग (SGM) में कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति होनी अनिवार्य है। इसके अलावा, सोसाइटी के कुल सदस्यों में से कम से कम 51% सदस्यों की लिखित मंजूरी होना आवश्यक है।

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NRI और बीमार सदस्यों के लिए वर्चुअल भागीदारी (VC)

अक्सर विदेश में रहने वाले या गंभीर रूप से बीमार सदस्य बैठकों में शामिल नहीं हो पाते थे। नई पॉलिसी के तहत एनआरआई, दिव्यांग और अस्वस्थ सदस्य अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए बैठक में शामिल हो सकते हैं और वोट दे सकते हैं। उनकी ऑनलाइन उपस्थिति को कोरम और 51% बहुमत दोनों में गिना जाएगा। डेवलपर चयन बैठक की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।

कम से कम 3 टेंडर और पारदर्शी प्रक्रिया

सोसाइटी द्वारा नियुक्त आर्किटेक्ट या प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) पहले FSI, TDR और ज़मीन का सर्वे कर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद डेवलपर चुनने के लिए कम से कम तीन प्रतिस्पर्धी बोलियां (Bids) मंगाना अनिवार्य होगा। यदि 3 से कम बोलियां आती हैं, तो टेंडर की समय-सीमा बढ़ानी होगी।

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3 महीने की सख्त समय-सीमा

महाराष्ट्र सरकार ने प्रोजेक्ट में देरी को रोकने के लिए सख्त समय-सीमा तय की है। डेवलपर चयन के 3 महीने के भीतर डेवलपमेंट एग्रीमेंट (DA) होना चाहिए। रजिस्टर्ड परमानेंट अल्टरनेटिव अकोमोडेशन एग्रीमेंट पर DA के 3 महीने के अंदर हस्ताक्षर होने चाहिए।

धोखाधड़ी पर सीधी कानूनी कार्रवाई

यदि रीडेवलपमेंट प्रक्रिया में कोई पदाधिकारी या मैनेजिंग कमेटी का सदस्य किसी बिल्डर से मिलीभगत, धोखाधड़ी या धोखेबाजी करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत कड़ी आपराधिक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, बैठक के मिनट्स, रिकॉर्डिंग और टेंडर के सभी कागजात हर सदस्य के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

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