महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur-Ratnagiri highway 8-Lane Update: महाराष्ट्र में नागपुर–रत्नागिरी हाईवे और प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विधान परिषद में अचानक माहौल गरमा गया। कई विधायकों ने आशंका जताई कि कहीं मौजूदा हाईवे को ही 6 या 8 लेन में बदलने की तैयारी तो नहीं, जबकि इसके समानांतर नया एक्सप्रेसवे भी प्रस्तावित है। इस बहस के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सदन में स्पष्टीकरण देना पड़ा। उनके बयान के बाद इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर नया राजनीतिक और आर्थिक सवाल खड़ा हो गया है।
सतेज पाटिल और अभिजीत वंजारी सहित अन्य विधान परिषद सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति साफ की। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधान परिषद में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार की नागपुर-रत्नागिरी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-166, 52, 361) को 6 या 8 लेन में बदलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हाईवे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकार क्षेत्र में आता है और केंद्र की ओर से इसके चौड़ीकरण का कोई प्रस्ताव अब तक प्राप्त नहीं हुआ है।
सदन में कई सदस्यों ने प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की उपयोगिता पर सवाल उठाए। विधायकों का तर्क है कि यह नया एक्सप्रेसवे मौजूदा नागपुर-रत्नागिरी हाईवे के समानांतर चलेगा, जिससे राज्य पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। साथ ही, कृषि भूमि, जंगलों और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई गई।
विपक्ष का कहना है कि वर्तमान हाईवे पहले से ही प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे वर्धा के पवनार और अमरावती के परतवाड़ा को जोड़ता है और वहां ट्रैफिक की कोई गंभीर समस्या नहीं है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे एक ‘एक्सेस-कॉन्ट्रोल्ड’ हाईवे है, जिसका उद्देश्य पूरी तरह अलग है। उन्होंने इसके प्रमुख लाभ गिनाए।
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सरकार ने आश्वस्त किया कि भूमि अधिग्रहण सरकारी मानदंडों के अनुसार उचित मुआवजे के साथ किया जाएगा। वन्यजीव मंजूरी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। वर्तमान में नागपुर-रत्नागिरी कॉरिडोर का लगभग 925.7 किमी हिस्सा चार लेन का है, जिसे 29,332 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।