सरकारी लीज भूमि पर मालिकाना दावा नहीं चलेगा, महाराष्ट्र सरकार ने रिकॉर्ड सुधारने का अभियान शुरू किया
Maharashtra Government Lease Land Record: महाराष्ट्र सरकार ने लीज पर दी गई सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। कब्जेदार के रूप में ‘महाराष्ट्र शासन’ का नाम दर्ज किया जाएगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
देवेंद्र फडणवीस (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Maharashtra Government Lease Land Record Update: महाराष्ट्र में भाडेपट्टे पर दी गई सरकारी जमीनों पर मालिकाना हक का दावा करने वाली संस्थाओं, कंपनियों और व्यक्तियों को फडणवीस सरकार ने बड़ा झटका दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने फैसला लिया है कि ऐसी सभी जमीनों के अधिकार अभिलेख में अब केवल ‘महाराष्ट्र शासन’ का ही नाम कब्जेदार के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में विशेष अभियान चलाकर 3 महीने के भीतर सभी रिकॉर्ड अपडेट करने के आदेश दिए गए हैं।
कब्जेदार के रूप में दर्ज रहेगा महाराष्ट्र शासन का नाम
राजस्व विभाग को जांच में पता चला कि कई सरकारी जमीनें 30, 99 या 999 वर्षों की लीज पर दिए जाने के बावजूद उनके रिकॉर्ड में कब्जेदार के रूप में शासन के बजाय भाडेपट्टा धारकों के नाम दर्ज हो गए हैं।
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इससे कई संस्थाएं और व्यक्ति इन जमीनों को निजी संपत्ति मानकर मालिकाना दावा कर रहे थे। इसके कारण अनेक न्यायालयीन विवाद भी सामने आए हैं। सरकार ने इस स्थिति को सुधारने भाडेपट्टे पर दी गई सभी सरकारी जमीनों के अधिकार अभिलेख में कब्जेदार के रूप में केवल महाराष्ट्र शासन का नाम दर्ज रहेगा।
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‘अन्य अधिकार’ कॉलम में दर्ज होंगे पट्टाधारक
नई व्यवस्था के तहत भाडेपट्टा धारकों का नाम, पट्टे की अवधि और जमीन दिए जाने की शर्तों की जानकारी ‘अन्य अधिकार कॉलम में दर्ज की जाएगी, इससे लीज धारकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे लेकिन जमीन की मूल मालिकी सरकार के नाम पर ही स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगी। राज्य के सभी जिलाधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर 3 महीने के भीतर रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए है। साथ ही पुराने दीर्घकालीन पट्टों के मामलों में आवश्यकतानुसार ‘भोगवटदार वर्ग-2 की नोंद लेकर शासन को रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। मुंबई शहर की सरकारी जमीनों पर लागू हस्तांतरण प्रतिबंधों की नोंद भी तत्काल अधिकार अभिलेख में दर्ज की जाएगी।
